रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर शुक्रवार को आइसा ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ किया गया। आइसा ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने प्रतिवाद सभा भी की। प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर हिरासत में लिए गए लोगों के समर्थन में नारे लगाए। इनमें भाकपा माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, आइसा की केंद्रीय अध्यक्ष नेहा और महासचिव प्रसेनजीत का नाम शामिल था। योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के समर्थन में भी नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग की। शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर SIR के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हुआ था। उस प्रदर्शन में योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और अन्य लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकी नाथ ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं होने पर चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने दावा किया कि तीन मुख्य चुनाव आयुक्तों में दो की सहमति नहीं होने के बावजूद निर्णय लिया गया। उन्होंने पूछा कि आपत्ति जताने वाले चुनाव आयुक्तों की बात क्यों नहीं मानी गई। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज के पीछे निजी हितों की भूमिका पर भी सवाल उठाया।
आइसा रांची जिला अध्यक्ष विजय कुमार ने SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन्होंने गोवा की घटना का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार जांच में योग्य पाए गए लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़े गए। उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया। विजय कुमार ने जंतर-मंतर की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नागरिकों के मतदान अधिकार के पक्ष में आवाज उठाने वालों को गिरफ्तार किया गया। आइसा कार्यकर्ता सुहानी मेहता ने मतदान के संवैधानिक अधिकार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद नागरिकों को मतदान का अधिकार मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इसी अधिकार पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने पेपर चोरी और भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर आरोप लगाए। सुहानी मेहता ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने SIR की प्रक्रिया रद्द करने की मांग की। उन्होंने SIR के बाद हुए चुनावों को रद्द करने की मांग भी रखी। प्रदर्शन में आइसा और भाकपा माले से जुड़े दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे। कई छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पुलिस या चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है।



