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जापान में मौत की सजा पाए कैदी को 11.98 करोड़ रुपये का मुआवजा.

जापान में मौत की सजा पाए एक व्यक्ति को 11.98 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया गया है।

इस व्यक्ति का नाम हकामादा इवाो है, जिसे 1966 में हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया गया था।

हकामादा को 1968 में मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में उनकी सजा को गलत ठहराया गया।

कोर्ट ने कहा कि हकामादा से अमानवीय तरीके से पूछताछ की गई थी।

इन पूछताछों का उद्देश्य जबरन कबूलनामा लेना था, जिसे हकामादा ने बाद में वापस ले लिया।

कोर्ट के अनुसार, पूछताछ के दौरान हकामादा पर मानसिक और शारीरिक रूप से अत्याचार किया गया था।

हकामादा को करीब 48 साल तक कैद में रखा गया, जो कि विश्व का सबसे लंबा मामला माना जाता है।

2014 में कोर्ट ने पाया कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे और उन्हें रिहा कर दिया गया।

इस मामले में कोर्ट ने स्वीकार किया कि हकामादा के साथ अन्याय हुआ था।

हकामादा के वकीलों ने उनके लिए न्याय की मांग करते हुए मुआवजे की अपील की थी।

कोर्ट ने अब उन्हें करीब 11.98 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

इस फैसले के बाद हकामादा ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक अत्याचार सहा है और अब उन्हें न्याय मिला है।

उनकी बहन ने कहा कि वे अपने भाई की रिहाई के बाद से लगातार उनके लिए न्याय की मांग कर रही थीं।

यह मामला जापान के कानूनी सिस्टम में सुधार की मांग को और मजबूत कर सकता है।

मानवाधिकार संगठनों ने हकामादा के मामले को एक उदाहरण बताया है कि न्याय प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत है।

इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है।

हकामादा के समर्थन में कई संगठनों ने जापान सरकार से माफी मांगने की भी अपील की है।

जापान में ऐसे मामलों में मुआवजा मिलने के मामले बहुत ही दुर्लभ होते हैं।

हकामादा का मामला जापान के कानूनी इतिहास में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन चुका है।

अब 87 वर्षीय हकामादा अपने बाकी जीवन को परिवार के साथ शांति से बिताने की उम्मीद कर रहे हैं।

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