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अमेरिकी रक्षा मंत्री पर गोपनीय सैन्य जानकारी लीक करने का आरोप.

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों पर सैन्य हमलों की गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप लगा है।

जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कई अधिकारियों ने एक सुरक्षित मैसेजिंग ऐप ‘सिग्नल’ पर यमन में हौती विद्रोहियों पर होने वाले हमलों की योजना साझा की थी।

चौंकाने वाली बात यह है कि इस ग्रुप चैट में ‘द अटलांटिक’ पत्रिका के एडिटर-इन-चीफ जेफरी गोल्डबर्ग भी शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार, गोल्डबर्ग को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वॉल्ट्ज ने गलती से इस ग्रुप में जोड़ा था।

इस चैट में संभावित हमलों के लक्ष्यों, हथियारों के प्रकार और हमले के क्रम से संबंधित जानकारी साझा की गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों की योजना मार्च 15 को गोल्डबर्ग को मिली और दो घंटे बाद ही अमेरिका ने यमन में हौती ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए।

व्हाइट हाउस के अनुसार, इस मामले की जांच राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) कर रही है।

डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे सुरक्षा विफलता करार दिया है।

सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि यह सैन्य खुफिया का एक चौंकाने वाला उल्लंघन है।

सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के प्रमुख जैक रीड ने कहा कि यह प्रशासन की सबसे बड़ी सुरक्षा चूक में से एक है।

कांग्रेस सदस्य जिम हीम्स ने कहा कि उन्हें इस घटना से बेहद हैरानी हुई है और इसकी तुरंत जांच होनी चाहिए।

रक्षा मंत्री हेगसेथ ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी ने युद्ध योजनाएं साझा नहीं की थीं।

उन्होंने पत्रकार गोल्डबर्ग को ‘भ्रष्ट’ और ‘अविश्वसनीय’ कहकर हमला किया।

ट्रंप ने शुरू में कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

बाद में ट्रंप ने इस घटना पर मजाक करते हुए कहा कि ‘द अटलांटिक’ में कुछ भी छपवाना वैसे भी किसी के देखने लायक नहीं होता।

ट्रंप प्रशासन ने गोपनीय जानकारी लीक होने की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाने की बात कही है।

इस मामले के बाद रक्षा विभाग में संवेदनशील जानकारी लीक होने से बचाने के लिए पॉलिग्राफ टेस्ट की योजना बनाई जा रही है।

सिग्नल ऐप को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन यह क्लासिफाइड सूचनाओं को साझा करने के लिए उपयुक्त नहीं है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की घटनाएं अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं।

अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की जांच में क्या खुलासे होते हैं।

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