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भारत-अमेरिका संबंध ‘परीक्षा’ के दौर से गुजर रहे.

'लेन-देन' शब्द इसे परिभाषित नहीं करता: विशेषज्ञ.

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच संबंध वर्तमान में एक महत्वपूर्ण ‘परीक्षा’ के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि इस रिश्ते को केवल ‘लेन-देन’ (Transactional) के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच साझेदारी कहीं अधिक गहरी और बहुआयामी है, जो केवल तात्कालिक लाभों से परे है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-अमेरिका संबंध, विशेष रूप से उनकी रक्षा साझेदारी के संदर्भ में, पूरी तरह से ‘संरेखित’ (fully aligned) थे और यह रिश्ता पहले से कहीं अधिक मजबूत होकर उभरा है। दोनों देशों ने रणनीतिक सहयोग, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह साझेदारी साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भू-राजनीतिक हितों पर आधारित है।

हालांकि, वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों के मद्देनजर, दोनों देशों को अपने संबंधों की गतिशीलता को बनाए रखने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘परीक्षा’ दोनों देशों को एक-दूसरे की जरूरतों और चिंताओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे यह रणनीतिक साझेदारी और भी सुदृढ़ हो सकेगी।

 

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