चीन द्वारा महत्वपूर्ण चुंबकों पर निर्यात नियंत्रण कड़ा करने से भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है। इस कदम से भारतीय वाहन निर्माताओं को अब गंभीर आपूर्ति-पक्ष बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे भारत में ईवी क्रांति की गति धीमी पड़ने की आशंका है।
उद्योग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें बढ़ सकती हैं। चीन दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग होने वाले कई उच्च-शक्ति वाले चुंबकों के लिए आवश्यक होते हैं। चीन के इन प्रतिबंधों का सीधा असर भारत की ईवी निर्माण क्षमताओं पर पड़ रहा है, क्योंकि भारतीय कंपनियां इन महत्वपूर्ण घटकों के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं।
यह स्थिति भारत के लिए अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है। सरकार और उद्योग को मिलकर ऐसी रणनीतियां विकसित करनी होंगी जिससे भविष्य में इस तरह की भू-राजनीतिक बाधाओं का सामना किया जा सके और भारत के ईवी क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।



