झारखंड में पिछले तीन वर्षों के दौरान ड्रग तस्करी के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता को उजागर किया है। इस अवधि में कुल 2114 मामले दर्ज किए गए हैं। ड्रग तस्करी के आरोप में 2829 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। इसके बावजूद अवैध नेटवर्क सक्रिय बने हुए हैं। नशे के कारोबार में युवाओं की भागीदारी चिंता बढ़ा रही है। कई मामलों में महिलाओं की संलिप्तता भी सामने आई है। सरकार ने इसे सामाजिक चुनौती बताया है। अधिकारियों ने निगरानी बढ़ाने की बात कही है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में 529 प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। इन मामलों में कुल 773 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2024 में मामलों की संख्या बढ़कर 803 हो गई। इस दौरान 1062 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद वर्ष 2025 में 782 प्राथमिकी दर्ज हुईं। इस वर्ष 994 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। पुलिस ने हेरोइन और ब्राउन शुगर की बड़ी खेप भी जब्त की। कई जिलों में विशेष अभियान चलाए गए। ड्रग नेटवर्क के खिलाफ लगातार छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसियां आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने में जुटी हैं।
सरकार ने ड्रग तस्करी रोकने के लिए एंटी नारकोटिक्स फोर्स का गठन किया है। केंद्रीय एजेंसियां भी राज्य पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई कर रही हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि ड्रग तस्करी समाज के लिए गंभीर खतरा है। पुलिस ने आम लोगों से सहयोग की अपील की है। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत देने को कहा गया है। सरकार ने सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। आने वाले समय में और अभियान चलाने की योजना है।



