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‘कोयला अब ब्लैक नहीं ग्रीन केमेस्ट्री’ सीएसआईआर की डीजी बोली- ऊर्जा के अन्य स्रोत की तलाश समय की मांग

सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन कलैसेल्वी ने कहा है कि हरित ऊर्जा परियोजनाएं समय की मांग की है। उन्होंने कहा कि अब कोयला सिर्फ ब्लैक केमेस्ट्री नहीं रह गया, बल्कि यह ग्रीन कैमेस्ट्री भी है। डॉ. एन कलैसेल्वी मंगलवार को रांची में सीएसआईआर-केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सिम्फर) की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। इस मौके पर उन्होंने देशव्यापी अभियान के तहत ‘एक सप्ताह एक प्रयोगशाला- कार्यक्रम का भी उद्घाटन किया।


कोयला से ऊर्जा के अन्य स्त्रोत की तलाश

डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि सिम्फर की ओर से गहरे खदानों में कोयला उत्पादन से लेकर राख के समुचित उपयोग के लिए सहायता उपलब्ध कराई गई है। नई टेक्नोलॉजी से भूमिगत खदानों में खनन कार्य में सुविधा हुई है, वहीं नियंत्रित विस्फोट से कई तरह के हादसों से भी बचा सकता है। उन्होंने कहा कि सिम्फर कोयला खदानों में कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन गैस और कोयला से हाइड्रोजन और मेथनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास में लगा है। इसके अलावा सिम्फर के सहयोग से कोयले की किफायती और पर्यावरण के हित में वॉशिंग के कार्य किए जा रहे हैं। डॉ. कलैसेल्वी ने देशभर के विद्युत संयंत्रों को आपूर्ति किए जा रहे कोयले की गुणवत्ता निर्धारित करने के जटिल कार्य में सिम्फर के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि सिम्फर के इंटरवेंशन के बिना खदानों में ढलानों की सुरक्षा बनाए रखना संभव नहीं है। जब भी देश में खदानों के सुरक्षित और किफायती संचालन की बात आएगी, तो सिम्फर ही पथप्रदर्शक के रूप में जाना जाएगा।

माइनिंग के अलावा तेल, गैस और खनन के लिए सुरक्षित परीक्षण

सिम्फर के निदेशक प्रो. अरविंद कुमार मिश्रा ने कहा कि संस्थान की ओर से बेहतर माइनिंग के अलावा जलविद्युत परियोजनाओं, हवाई अड्डों और रेलवे के लिए भी कई नई तकनीक विकसित की गई। उन्होंने कहा कि सिम्फर लैब में तेल, गैस, खनन, रिफाइनरियों, हथियारों और गोला-बारूद डिपो में उपयोग किए जाने वाले सभी फ्लेम प्रूफ उपकरणों का सुरक्षित परीक्षण किया जाता है। इस दौरान सिम्फर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को वीडियो के माध्यम से भी दर्शाया गया।

उद्घाटन सत्र में ये भी थे उपस्थित

समारोह को सीएसआईआर-आईआईसीबी के निदेशक डॉ. अरूण और सीएसआईआर-आईएमएमटी के निदेशक डॉ. रामानुज, निदेशक ने भी संबोधित किया। इसके अलावा हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के सीईओ अरूण मिश्रा, एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमनाराव और डीन डॉ. मनोज प्रधान के अलावा गोमस्ता, आईआईपीई समेत अन्य शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों समेत अन्य वैज्ञानिकों-प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया।

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