30 दिसंबर को पंजाब बंद के लिए किसानों को व्यापक समर्थन.
चंडीगढ़: पंजाब किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने गुरुवार को कहा कि 30 दिसंबर को घोषित 'पंजाब बंद' को विभिन्न वर्गों से अच्छा समर्थन मिल रहा है।
यह बंद संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा द्वारा बुलाया गया है।
मुख्य बिंदु:
बंद का समय: पंजाब बंद सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। आपातकालीन सेवाओं को इससे बाहर रखा गया है।
संगठनों का समर्थन: ट्रांसपोर्टर्स, व्यापारियों, कर्मचारी यूनियनों, सरपंचों, शिक्षकों, टोल प्लाजा कर्मचारियों और अन्य समूहों ने बंद का समर्थन किया है।
आंदोलन का उद्देश्य: किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सहित अन्य मांगों को मनवाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डाल रहे हैं।
आंदोलन स्थल: किसान 13 फरवरी से शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं।
धरना-प्रदर्शन: किसानों के जत्थों ने 6, 8 और 14 दिसंबर को दिल्ली में प्रवेश की कोशिश की, लेकिन उन्हें हरियाणा में रोक दिया गया।
प्रमुख मांगें:
MSP की कानूनी गारंटी।
किसानों और मजदूरों के लिए कर्ज माफी और पेंशन।
बिजली दरों में बढ़ोतरी न हो।
भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की बहाली।
नेताओं के बयान:
जगतजीत सिंह डल्लेवाल: 26 नवंबर से अनशन पर हैं। उनकी बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई जा रही है।
काका सिंह कोटरा: उन्होंने कहा कि पंजाब की सत्तारूढ़ आप सरकार किसानों के मुद्दे पर केंद्र पर दबाव बनाने में विफल रही है।
स्पीकर कुलतार सिंह संधवां: उन्होंने किसानों के संघर्ष को “पूरे देश का मुद्दा” बताया और प्रधानमंत्री से अपील की कि उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाए।
सरकार का रवैया:
पंजाब सरकार ने केंद्र से बातचीत की प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया है। स्पीकर संधवां ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों के समर्थन में हर संभव प्रयास कर रही है।
निष्कर्ष:
किसानों का यह आंदोलन केवल पंजाब का नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों के भविष्य से जुड़ा है। अगर केंद्र ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो यह आंदोलन और तेज हो सकता है।



