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झारखंड बन रहा विपक्षी सियासत का अखाड़ा, नीतीश के बाद अब केजरीवाल मिले हेमंत सोरेन से

झारखंड विपक्षी सियासत का केंद्र बन गया है। झारखंड में लोकसभा की सिर्फ 14 सीटें हैं, जिनमें 12 पर बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी आजसू का कब्जा है। फिर भी विपक्षी नेताओं को सीएम हेमंत सोरेन की ताकत और उनकी सूझबूझ पर अधिक भरोसा है। यही कारण है कि विपक्ष को एक करने के अभियान में नीतीश कुमार ने पहले अपनी पार्टी के अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को भेजा और हफ्ते भर बाद खुद मिलने रांची पहुंच गए। दिल्ली में सेवा अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी के नेता और सीएम अरविंद केजरीवाल को भी अब विपक्ष की मदद की जरूरत पड़ी है। इसलिए वे पंजाब के सीएम और अपनी पार्टी के सांसद-मंत्रियों के साथ वे हेमंत सोरेन से मिलने रांची पहुंचे थे।

विपक्षी एकता के लिए नीतीश कुमार आए थे

बीजेपी को देश की सत्ता से बेदखल करने के अभियान में लगे नीतीश कुमार विपक्षी दलों के नेताओं से मिलते रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में विपक्षी नेताओं से मिलने के बाद बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। महाराष्ट्र जाकर एनसीपी नेता शरद पवार और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता उद्धव ठाकरे से उन्होंने मुलाकात की। ओड़िशा के सीएम नवीन पटनायक से भी नीतीश ने भुवनेश्वर में भेंट की। हालांकि बाकी नेताओं की तरह पटनायक ने नीतीश को कोई आश्वासन नहीं दिया। नीतीश कुमार ने जेएमएम नेता और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन से मिलने के लिए पहले अपनी पार्टी के अध्यक्ष ललन सिंह को भेजा और बाद में खुद रांची आकर हेमंत से विपक्षी एकता में साथ देने का आग्रह किया। हेमंत ने उनकी बात स्वीकार कर ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई और ईडी के हल्ला बोल से उकताए हेमंत ने बीजेपी को केंद्रीय सत्ता से बेदखल करने में साथ देने का आश्वासन भी दिया। पटना में 12 जून को विपक्षी दलों की बैठक में हेमंत शिरकत भी करेंगे।

अध्यादेश पर समर्थन मांगने केजरीवाल आए

अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार एलजी से छीन कर सुप्रीम कोर्ट ने जब अरविंद केजरीवाल सरकार को देने का फैसला सुनाया तो केंद्र सरकार ने अध्यादेश जारी कर कोर्ट के फैसले को पलट दिया। उसके बाद से अरविंद केजरीवाल विपक्षी दलों के दर पर दस्तक देते फिर रहे हैं। केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी विपक्षी एकता में शामिल होने का आश्वासन दे चुकी है। हालांकि इस संबंध में नीतीश जब उनसे मिले थे, उसके तुरंत बाद आप के जेनरल सेक्रेट्री ने यह कह कर विपक्ष में सनसनी फैला दी कि उनकी पार्टी किसी पार्टी या गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। आम आदमी पार्टी अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस को यह नागवार लगा, लेकिन चुप रहने के सिवा तब कोई रास्ता नहीं था। जब अध्यादेश जारी हो गया तो केजरीवाल को विपक्षी एकता की शिद्दत से जरूरत महसूस हुई। वे कांग्रेस नेताओं से मिलने का वक्त मांग रहे हैं, लेकिन कोई कुछ साफ बोल नहीं रहा। इस बीच कांग्रेस की दिल्ली और पंजाब की प्रदेश इकाइयों के दबाव में कांग्रेस ने अध्यादेश पर आप का साथ देने से मना कर दिया है। बहरहाल, केजरीवाल अपने कुनबे के साथ आज (शुक्रवार) झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन से मिलने रांची पहुंचे थे। हेमंत ने उन्हें अध्यादेश पर साथ देने का आश्वासन दिया है।

तेजस्वी तो पहले से मिलते रहे हैं सीएम हेमंत से

बिहार के डेप्युटी सीएम और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव तो पहले से ही हेमंत सोरेन के संपर्क में हैं। झारखंड में कांग्रेस और जेएमएम के गठबंधन में आरजेडी भी शामिल है। इसलिए बीच-बीच में तेजस्वी हेमंत के संपर्क में बने रहते हैं। बिहार में महागठबंधन की सरकार न रहने पर भी तेजस्वी रांची आकर हेमंत से मिलते रहे हैं। नीतीश कुमार जब हेमंत से मिलने आए थे तो साथ में तेजस्वी यादव भी थे। युवा होने के नाते हेमंत और तेजस्वी में अच्छी दोस्ती भी है। हेमंत के पिता शिबू सोरेन और तेजस्वी के पिता लालू यादव भी अच्छे मित्र रहे हैं। हालांकि दोनों की मित्रता का एक शत्रु पक्ष भी है। अलग झारखंड राज्य की मांग शिबू सोरेन करते रहे, लेकिन लालू ने विधानसभा से झारखंड को अलग राज्य बनाने के खिलाफ प्रस्ताव पास करा लिया था। लालू ने तब कहा था कि झारखंड अलग राज्य उनकी लाश पर ही बन सकता है।

ममता बनर्जी से भी हेमंत की रही है नजदीकी

हेमंत सोरेन की बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से नजदीकी रही है। पिछले साल झारखंड के दो ऐसे मामले कोलकाता में उजागर हुए, जो बिना सियासी सांठगांठ के संभव नहीं था। झारखंड हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता को नोटों के साथ कोलकाता पुलिस ने पकड़ा तो कांग्रेस के तीन विधायक नोटों के साथ कोलकाता में पकड़े गए। पकड़े गए वकील के बारे में बताया जाता है कि वे हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ पीआईएल की पैरवी कर रहे थे। कांग्रेस के जो विधायक पकड़े गए, उनके बारे में चर्चा थी कि वे बीजेपी ज्वाइन करने वाले हैं। उनके साथ कुछ और विधायक भी ज्वाइन कर सकते हैं। इन दोनों गिरफ्तारियों के बारे में माना जाता है कि ममता और हेमंत की राय-सालह के बाद ही गिरफ्तारियों का जाल बंगाल में बिछाया गया। ममता और हेमंत सोरेन की नजीदीकी इस बात से भी समझी जा सकती है कि बंगाल विधानसभा चुनाव में जेएमएम ने आदिवासी बहुल सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला वापस ले लिया था, ताकि ममता की पार्टी टीएमसी की जीत में कोई व्यवधान न आए।

एमके स्टालिन ने भी अपनी बैठक में बुलाया था

तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के कार्यक्रमों में भी हेमंत सोरेन शिरकत करते रहे हैं। तीन महीने पहले दिल्ली में स्टालिन ने कुछ विपक्षी दलों की एक बैठक बुलाई थी। हेमंत सोरेन उस बैठक में शामिल हुए थे। स्टालिन की बैठक में तेजस्वी यादव ने भी हिस्सा लिया था। हेमंत की पूछ इसलिए भी विपक्षी दलों में बढ़ी है कि वे झारखंड में गठबंधन की सरकार चला रहे हैं, जिसमें कांग्रेस ऐर आरजेडी शामिल है। छत्तीसगढ़ के सीएम से भी हेमंत की खूब छनती है। जब हेमंत को यह आशंका हुई कि उनकी सरकार को अपदस्थ किया जा सकता है तो वे गठबंधन के विधायकों को लेकर छत्तीसगढ़ ही गए थे।

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