सिद्धारमैया जब-जब आते हैं कर्ज बढ़ जाता है… लिखने पर टीचर सस्पेंड हो गया लेकिन क्या है सच्चाई?
जब-जब सिद्धारमैया की सरकार आती है, तब-तब राज्य पर कर्ज बढ़ जाता है। कर्नाटक में एक सरकारी टीचर की टिप्पणी चर्चा में है। इस फेसबुक कॉमेंट के बाद चित्रदुर्ग जिले के शिक्षक शांतामूर्ति एमजी को सस्पेंड कर दिया गया है। टीचर ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि मुफ्त वादों पर अमल करने की वजह से राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ता चला जाता है। इस पोस्ट में शांतामूर्ति ने यह भी कहा कि सिद्धारमैया के पिछले कार्यकाल में (2013-18) के बीच कर्नाटक का कर्ज बढ़कर 2 लाख 42 हजार करोड़ तक पहुंच गया। आइए जानते हैं टीचर के दावे में कितनी हकीकत है और क्या सिद्धारमैया की सरकार में कर्नाटक पर कर्ज में उछाल आता है।
सिद्धारमैया ने 22 महीने में लिया था सबसे ज्यादा कर्ज
सिद्धारमैया सबसे पहले 2013 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे। पूरे पांच साल तक उन्होंने कांग्रेस की सरकार चलाई। शिक्षक शांतामूर्ति ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि एसएम कृष्णा से लेकर जगदीश शेट्टार के कार्यकाल में लोन का आंकड़ा 71,331 करोड़ रुपये था। वहीं सिद्धारमैया के सीएम रहते यह आंकड़ा 2.42 लाख करोड़ रुपये तक चला गया। कर्ज के आंकड़े में कितनी सच्चाई है, इसके बारे में छानबीन करने पर कोई आधिकारिक दस्तावेज तो नहीं मिला। हां यह बात जरूर है कि सिद्धारमैया जब सीएम थे तो कर्ज लेने के मामले में उन्होंने अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया था।RTI का जवाब- 39166 करोड़ कर्ज लिया
दिसंबर 2015 में सिद्धारमैया सरकार के कर्ज के आंकड़ों के बारे में एक आरटीआई से जानकारी सामने आई थी। आरटीआई ऐक्टिविस्ट भीमप्पा गदड़ की आरटीआई के जवाब में पता चला कि सिद्धारमैया सरकार ने अपने 22 महीने के कार्यकाल (उस वक्त) में 39166.44 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। यह तमाम पिछले रेकॉर्ड्स से ज्यादा था। वित्त विभाग ने आरटीआई का जवाब देते हुए बताया कि राज्य पर 1 लाख 5 हजार 584 करोड़ का कर्ज है। आरटीआई के जवाब में बताया गया कि बीएस येदियुरप्पा, डीवी सदानंद गौड़ा और जगदीश शेट्टार के सीएम रहते हुए 2008 से 2013 के दौरान 48,476 करोड़ का लोन लिया गया। शांतामूर्ति ने दावा किया कि शेट्टार के कार्यकाल तक लोन का आंकड़ा 71,331 करोड़ था। यह हकीकत से उलट नजर आता है, क्योंकि आरटीआई
में इससे 23 हजार करोड़ रुपये कम कर्ज की जानकारी दी गई है। एक नजर 1999 से लेकर 2015 तक मुख्यमंत्रियों के कर्ज के आंकड़ों पर:




