मुंबई, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति में एक दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला, जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता और कार्यकर्ता महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) द्वारा आयोजित एक रैली में मराठी अस्मिता के समर्थन में शामिल हुए। इस दौरान सड़कों पर भारी ड्रामा और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
यह रैली मराठी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी, जिसमें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दरकिनार कर विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई। इसी दौरान, कथित तौर पर एक शिवसेना मंत्री को रैली के दौरान घेरा गया और उनके खिलाफ नारेबाजी भी हुई। यह घटना दर्शाती है कि मराठी अस्मिता का मुद्दा राज्य की राजनीति में कितना संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। पुलिस को व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
इस रैली ने महाराष्ट्र में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है। विपक्षी दल एक साझा मुद्दे पर एकजुट होते दिख रहे हैं, जबकि सत्ताधारी गठबंधन को अपने ही सहयोगियों से अप्रत्याशित विरोध का सामना करना पड़ रहा है।


