नई दिल्ली, 15 मई: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर कड़ा जवाब दिया है, जिसमें अदालत ने तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल मामले में राज्यपाल और राष्ट्रपति को राज्य विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए समयसीमा निर्धारित की थी। राष्ट्रपति ने कहा है कि संविधान में इस तरह की कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।
राष्ट्रपति ने अपने बयान में संविधान के अनुच्छेद 200 और 201 का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल को किसी विधेयक को मंजूरी देने, रोकने या राष्ट्रपति के पास भेजने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं है। इसी तरह, अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति के पास यह अधिकार है कि वह राज्य के किसी विधेयक को मंजूरी दें या अस्वीकार करें, लेकिन इसके लिए भी कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि इन संवैधानिक प्रावधानों में राज्य और केंद्र के बीच संतुलन, राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और विधिक समानता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा, यह विषय संघवाद और शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर समय-समय पर विरोधाभासी फैसले दिए हैं। राज्यों द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत अदालत का रुख करना संविधान की व्याख्या की आवश्यकता को दर्शाता है।



