वे अगरतला स्थित सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (CAU) के 5वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
वी. नारायणन ने बताया कि ISRO के सैटेलाइट्स कृषि, टेली-एजुकेशन, टेली-मेडिसिन, मौसम पूर्वानुमान, टेलीविज़न प्रसारण, पर्यावरण संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में आम जनता की सेवा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले प्राकृतिक आपदाओं में हजारों लोग अपनी जान गंवा देते थे, लेकिन अब सैटेलाइट्स की सहायता से जान-माल की हानि बहुत कम हो गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए सैटेलाइट तकनीक अनिवार्य हो चुकी है।
ISRO चेयरमैन ने गर्व के साथ कहा कि भारत ने अंतरिक्ष के 9 क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर नंबर एक स्थान प्राप्त किया है।
उन्होंने बताया कि चंद्रयान-1 मिशन ने चंद्रमा की सतह पर जल अणुओं की खोज कर दुनिया को चौंका दिया था।
भारत ऐसा करने वाला पहला देश बना था।
उन्होंने कहा कि अब तक भारत से 34 देशों के 433 सैटेलाइट्स को लॉन्च किया जा चुका है।
उनके अनुसार, ISRO न केवल देश की जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष ताकत भी बन चुका है।


