इस मुलाकात को लेकर विपक्ष, खासकर भाजपा ने कई सवाल खड़े किए हैं और इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताया है।
बैठक को लेकर उठे सवाल
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा,
“हेमंत सरकार हमेशा से उद्योगपतियों के लिए दरवाजे खोलती रही है, लेकिन जब आम जनता की बात आती है तो फैसले लेने में महीनों लग जाते हैं। आखिर गौतम अडाणी के साथ यह गोपनीय बैठक क्यों की गई? इसमें क्या डील हुई?”
भाजपा ने सरकार से बैठक के एजेंडे को सार्वजनिक करने की मांग की है और आरोप लगाया कि यह मुलाकात खनन और ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी हो सकती है, जिसमें बड़े स्तर पर सौदेबाजी हुई होगी।
सरकार ने दी सफाई
झारखंड सरकार के प्रवक्ता ने बैठक को लेकर सफाई देते हुए कहा कि यह एक औपचारिक मुलाकात थी और इसमें झारखंड में नए निवेश और रोजगार सृजन को लेकर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा,
“गौतम अडाणी की कंपनी झारखंड में ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में निवेश करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री के साथ यह बैठक राज्य के विकास को लेकर थी, इसमें कुछ भी गुप्त नहीं है।”
क्या है अडाणी ग्रुप की योजना?
सूत्रों के मुताबिक, अडाणी ग्रुप झारखंड में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर निवेश करने की योजना बना रहा है, जिनमें शामिल हैं:
ऊर्जा उत्पादन और वितरण परियोजनाएं
कोयला खनन और ट्रांसपोर्टेशन
ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह बैठक निजी हितों को साधने के लिए की गई थी और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
विपक्षी दलों ने भी उठाए सवाल
भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के भी कुछ नेताओं ने इस बैठक को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता सुबोध कांत सहाय ने कहा,
“झारखंड के खनिज संसाधनों को बड़े उद्योगपतियों को सौंपने की साजिश हो रही है। सरकार को इस मुलाकात की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।”
क्या आगे होगा?
भाजपा ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की बात कही है और मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग की है। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद से कैसे निपटती है और क्या अडाणी ग्रुप के झारखंड में निवेश की योजना पर कोई आधिकारिक घोषणा होती है या नहीं।


