ईरान ने अमेरिका से सीधे वार्ता करने से किया इनकार, परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ी तनातनी.
दुबई: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ सीधे परमाणु वार्ता नहीं करेगा।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को भेजे गए पत्र के जवाब में आया है।
ईरान ने ओमान के जरिए अमेरिका को अपना संदेश भेजा, जिसमें अप्रत्यक्ष वार्ता की संभावना बनी रहने की बात कही गई।
लेकिन ट्रंप के 2018 में परमाणु समझौते से पीछे हटने के बाद से दोनों देशों के बीच वार्ता रुकी हुई है।
इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
गाजा युद्ध के बाद ईरान समर्थित समूहों पर हमले हुए हैं, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष गहराया है।
अमेरिका यमन में ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों पर लगातार हमले कर रहा है।
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने कहा कि अमेरिका को पहले भरोसा कायम करना होगा।
वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।
ट्रंप ने कहा कि वह ईरान से समझौते के लिए तैयार हैं, लेकिन अन्य विकल्प भी खुले हैं।
ईरान में पेज़ेश्कियान के बयान को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया आई है।
ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई पहले ही ट्रंप प्रशासन से वार्ता को अनुचित बता चुके हैं।
इसके बाद पेज़ेश्कियान ने भी अमेरिका के प्रति अपना रुख सख्त कर लिया।
हाल ही में ईरान के कुद्स दिवस पर “डेथ टू अमेरिका” के नारे नहीं लगाए गए।
इसके बजाय, केवल “डेथ टू इसराइल” के नारे सुनाई दिए, जिससे संकेत मिलते हैं।
ईरान की सेना ने हाल ही में एक मिसाइल बेस का वीडियो जारी किया।
इस वीडियो में इसराइली झंडे को पैरों तले रौंदते हुए दिखाया गया, लेकिन अमेरिकी झंडा नहीं दिखा।
अब देखना होगा कि ईरान और अमेरिका के बीच यह तनाव और कितना बढ़ता है।
क्षेत्रीय संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं।


