खीची ने भाजपा के किशन लाल को महज तीन वोटों के अंतर से हराया। खीची को 133 वोट मिले, जबकि लाल को 130 वोट मिले। दो वोट अमान्य घोषित किए गए और कुल 256 वोट डाले गए थे।
खीची की जीत को आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए AAP के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AAP के पार्षदों ने “जय भीम” के नारों के साथ जीत का जश्न मनाया, यह दर्शाते हुए कि एक दलित उम्मीदवार महापौर पद पर बैठा है।
महापौर चुनाव के बाद भाजपा ने उपमहापौर की दौड़ से हटने का फैसला किया, जिससे AAP के रविंदर भारद्वाज को बिना किसी मुकाबले के जीत मिली। कांग्रेस पार्टी ने वोटिंग का बहिष्कार किया और दलित महापौर को संक्षिप्त कार्यकाल की बजाय पूरा कार्यकाल देने की मांग की।
सत्र के दौरान कांग्रेस के पार्षदों ने नारेबाजी की और AAP पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया। एक चौंकाने वाली घटना में कांग्रेस की पार्षद सबीला बेगम ने वोटिंग से पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया और AAP का समर्थन किया।
इस वोटिंग प्रक्रिया में AAP के सांसद संजय सिंह और एन.डी. गुप्ता समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए।
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