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भारत में एक-सींग वाले एशियाई गैंडों की संख्या चार दशकों में तिगुनी हुई

रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, एक-सींग वाले और मोटी, कवच जैसी त्वचा के लिए जाने जाने वाले इन जानवरों की संख्या चार दशक पहले 1,500 से बढ़कर अब 4,000 से अधिक हो गई है।

गैंडों का शिकार उनके सींग के लिए किया जाता है, जो पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। वन्यजीव अधिकारी गैंडों की सुरक्षा के लिए सतर्क हैं और अवैध शिकार को रोकने के लिए सख्त उपाय कर रहे हैं।

गैंडों की बढ़ती संख्या भारत के संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। यह भी एक संकेत है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए समुदायों का सहयोग महत्वपूर्ण है।

भारत में एक-सींग वाले एशियाई गैंडों की संख्या चार दशकों में तिगुनी हुई
रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, एक-सींग वाले और मोटी, कवच जैसी त्वचा के लिए जाने जाने वाले इन जानवरों की संख्या चार दशक पहले 1,500 से बढ़कर अब 4,000 से अधिक हो गई है।

वन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह वृद्धि संरक्षण प्रयासों और समुदायों के समर्थन का परिणाम है। भारत में एक-सींग वाले एशियाई गैंडों की आबादी का 80 प्रतिशत हिस्सा असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में है।

गैंडों का शिकार उनके सींग के लिए किया जाता है, जो पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। वन्यजीव अधिकारी गैंडों की सुरक्षा के लिए सतर्क हैं।

गैंडों की बढ़ती संख्या भारत के संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। यह भी एक संकेत है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए समुदायों का सहयोग महत्वपूर्ण है।

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