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ED रेड के बाद कांग्रेस MLA अंबा प्रसाद का इल्जाम, बीजेपी टिकट पर हजारीबाग-चतरा से चुनाव लड़ने बनाया जा रहा था दबाव

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी समाप्त होने के बाद कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने राजनीतिक कारणों से परेशान करने का आरोप लगाया है। मंगलवार सुबह छह बजे से रात 12 बजे तक ईडी की छापेमारी चली। ईडी की टीम ने रांची स्थित आवास में भी अंबा प्रसाद से घंटों पूछताछ की। ईडी अधिकारियों के वापस लौट जाने के बाद कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि उन पर काफी दिनों से बीजेपी टिकट पर हजारीबाग लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। इससे इनकार करने के बाद पिछले कुछ दिनों से उनपर बीजेपी टिकट पर चतरा लोकसभा सीट सीट से चुनाव लड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। इसे लेकर बीजेपी-आरएसएस के कई नेता सुबह से ही उनके घर पर आकर बैठे रहते थे। लेकिन जब बीजेपी टिकट पर चतरा सीट से भी चुनाव लड़ने से उन्होंने इनकार कर दिया गया, तो बीजेपी के इशारे पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर उनपर दबाव बनाने की कोशिश की गई।

सुबह में अचानक बेडरूम तक आ पहुंचे ईडी के अधिकारी,टॉर्चर किया

कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने बताया कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान मंगलवार को दिन भर उन्हें परेशान किया गया। एक ओर उनकी मां और पूर्व विधायक निर्मला देवी बार में परेशान रहीं। जबकि ईडी के अधिकारियों ने घर में उन्हें भी टॉर्चर किया। उन्हें घंटों एक ही स्थान पर बिठाया गया और घंटों एक स्थान पर खड़े रखा। यहां तक कि सुबह-सुबह अचानक बेडरूम तक ईडी के अधिकारी पहुंच गए, उस अवस्था में अधिकारियों का पहुंचना बहुत ही दुःखद लगा।

एनटीपीसी और अडाणी के खिलाफ आवाज नहीं उठाने का दबाव

अंबा प्रसाद ने बताया कि बीजेपी के कई नेताओं की ओर बार-बार यह दबाव बनाने की कोशिश की जाती थी कि विस्थापितों के हित में वे एनटीपीसी और अडाणी समूह के खिलाफ आवाज नहीं उठाएं। लेकिन वो उन नेताओं की तरह नहीं है जो अपने सिर पर बीजेपी का नेमप्लेट लगाकर घूमने में गर्व महसूस करें। वे अपने क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए विजन के तहत काम कर रही है। जन आकाक्षांओं को पूरा करने के लिए हमेशा प्रत्यनशील रहेंगी। इस तरह की कार्रवाई से वो घबराने वाली नहीं हैं।


मोबाइल फोन, संदुक और कुछ दस्तावेज साथ ले गए अधिकारी

कांग्रेस विधायक ने बताया कि ईडी के अधिकारियों ने उनकी मां निर्मला देवी और पिता योगेंद्र प्रसाद के केस से संबंधित कुछ फाइलों के बारे में जानकारी मांगी। वो जो भी पूछते थे, उन्हें उन बातों की जानकारी दी गई। बहन का एक बायोमेट्रिक संदूक था, वो भी साथ ले गए। इसके अलावा मोबाइल फोन भी साथ ले गए। इसके साथ ही कुछ फाइल और विधानसभा से जुड़े कागजात भी साथ ले गए। हजारीबाग में जमीन के एक भूखंड के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में अंबा प्रसाद ने कहा कि जन प्रतिनिधि होने के नाते कई मामलों में लोगों के साथ उन्हें खड़ा होना पड़ता है। उस मामले में भी एक पक्ष की ओर से जब वो खड़ी हुई, तो एसडीओ ने निजी दुर्भावना से प्रेरित होकर कुछ अनर्गल आरोप लगाए, जिसकी शिकायत करने के बाद उन्हें वहां से हटा दिया गया।

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