‘एके-47 की तड़तड़ाहट से दहल उठा था धनबाद’, जानें एक पिस्टल से रणधीर वर्मा ने कैसे किया था खालिस्तानी आतंकियों से मुकाबला
3 जनवरी 1991 की वह घटना जिसे याद करके आज भी धनबाद वासियों के रोंगटे खड़ी कर देता है। ख़ौफ़ का वह मंजर हर किसी के दिलों दिमाग़ में आज भी जिन्दा है। धनबाद को आज भी याद आता है अपने हीरो की शहादत।
धनबाद के हीरापुर में एक बैंक लूटने आए खालिस्तानी आतंकवादियों से लोहा लेते हुए वीर गति को प्राप्त हुए धनबाद के तत्कालीन एसपी रणधीर प्रसाद वर्मा के किस्से हरेक की जुबां पर रहता है। नई पीढ़ी के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कौन थे-शहीद रणधीर वर्मा। रणधीर वर्मा भारतीय पुलिस सेवा के ऐसे पुलिस अधिकारी थे जो खुद ही मोर्चा लेने में भरोसा रखते थे। इसलिए शहादत के इतने सालों बाद भी उनके यश की गाथाएं सबकी जुबान पर है। उसी बैंक डकैती की घटना में अपराधियों के गोलियों का निशाना बने आईएसएम कर्मी श्यामल चक्रवर्ती का जिक्र आज भी होता है।
बीओआई के हीरापुर शाखा में खालिस्तानियों ने बोला था धावा
सुबह के करीब दस बज रहे थे। एसपी रणधीर वर्मा एसपी कोठी में थे। तभी उन्हें किसी ने फोन किया कि हीरापुर बिनोद मार्केट स्थित बैंक आफ इंडिया में डकैत घुस गए हैं। सूचना मिलते ही वह पिस्टल और एक अंगरक्षक को लेकर सीधे बैंक पहुंच गए। बैंक प्रथम तल पर था। सभी डकैत एके 47 से लैस थे। डकैतों को ललकाराते हुए रणधीर वर्मा सीढ़ी चढ़ गए। तभी ऊपर मौजूद एक आतंकवादी ने उन्हें गोली मार दी। गोली लगते ही वे गिर पड़े.बावजूद उन्होंने एक डकैत को गोली मारकर ढेर कर दिया। रणधीर वर्मा आखिरी सांस तक डकैतों का सामना करते हुए वीर गति को प्राप्त हो गए थे। उस दौरान आइएसएम कर्मी श्यामल चक्रवर्ती भी बैंक में थे। उन्होंने भी डकैतों का विरोध किया। डकैतों ने उन्हें भी गोली मार दी। इधर उनके अंगरक्षक भी गोली लगने से जख्मी हो गए। तब तक धनबाद थाना की पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। खुद को घिरते देख डकैत भागने लगे। बाद में एक और डकैत को पुलिस ने मार गिराया।
मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित
रणधीर वर्मा की मौत एक तेजस्वी परमवीर योद्धा की तरह शानदार ढ़ंग से हुई। राष्ट्रपति ने मरणोपरांत उन्हें विशिष्ट वीरता सम्मान से सम्मानित किया, जहां उद्घोषित हुआ कि यह राष्ट्र का सपूत भारतीय पुलिस सेवा में एक अनोखा उदाहरण है, जिसकी कर्तव्यपरायणता और साहस की मिसाल भारतीय पुलिस सेवा के पदाधिकारियों में अब तक नहीं मिली। उन जैसा देहदानी पुलिस विभाग में पहले कोई नहीं हुआ था। इसलिए भारत सरकार ने उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया तथा उनके सम्मान में डाक टिकट तक जारी किया।
रणधीर वर्मा स्टेडियम और रणधीर चौक बना
रणधीर वर्मा की शहादत के बाद बिहार सरकार ने धनबाद स्थित गोल्फ ग्राउंड का नामकरण रणधीर वर्मा स्टेडियम कर दिया था। अब इस स्टेडियम को आधुनिक लुक दिया जा चुका है। धनबाद शहर का यह एकमात्र बड़ा स्टेडियम है। कोहिनुर मैदान, रेलवे मैदान, जिला परिषद् मैदान जैसे अन्य खेल के स्थान धनबाद में मौजूद है। रणधीर वर्मा चौक धनबाद शहर के बीचो-बीच जिला मुख्यालय से कोई 500 गज की दूरी पर है। इसी चौक के पास रणधीर वर्मा शहीद हो गए थे। इस चौक पर शहीद रणधीर वर्मा की आदमकद प्रतिमा है, जहां प्रत्येक वर्ष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है। यह प्रतिमा धनबाद शहर में आकर्षण का केंद्र है।



