आरक्षण पर संघ प्रमुख का बयान, इंडिया बनाम भारत डिबेट…बीजेपी के मिशन 2024 का प्लान
जी-20 के शोर में बीच बीजेपी धीरे-धीरे मिशन 2024 के अपने (Lok Sabha Election 2024 news) प्रोजेक्ट में लगी हुई है। लक्ष्य है केंद्र की सत्ता में लगातार तीसरी बार (BJP’s Mission 2024) आना यानी जीत का हैटट्रिक। विपक्ष I.N.D.I.A. गठबंधन के तहत गोलबंद (I.N.D.I.A. vs NDA) हो रहा तो सरकार ने देश के नाम को लेकर ‘इंडिया बनाम भारत’ की (India vs Bharat debate) डिबेट को जन्म दे दिया। यहां तक कि जी-20 समिट (G 20 Summit 2023) के उद्घाटन सत्र में टेबल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने INDIA नहीं बल्कि रोमन में भारत यानी BHARAT लिखा हुआ था। कभी मंडल पॉलिटिक्स के जवाब में मंदिर की राजनीति करने वाली बीजेपी आज मंदिर को भी साधने में सफल है और मंडल को भी। वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में लिखे अपने लेख में कहती हैं कि जी-20 के बीच मंदिर, मंडल और भारत बीजेपी के मिशन 2024 को आकार दे रहे हैं।
चौधरी ने लेख की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान से करती हैं। उन्होंने लिखा है कि आरएसएस ने कभी भी दलितों और ओबीसी के आरक्षण का इतना पुरजोर समर्थन नहीं किया जितना सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस हफ्ते किया। 2015 में संघ प्रमुख ने आरक्षण नीति पर पुनर्विचार की जरूरत पर जोर दिया और कुछ हफ्ते बाद ही बीजेपी बिहार में विधानसभा का चुनाव हार गई। उसकी सीटें 91 से घटकर 53 रह गईं। अब वही मोहन भागवत अब स्वीकार कर रहे हैं कि हिंदू समाज में जो कथित निचली जातियां हैं उनके साथ पिछले 2000 वर्षों से जानवरों जैसा सलूक किया गया। उन्होंने कहा, ‘जब उनकी जिंदगी जानवरों जैसी बदतर हो गई तब भी हमें कोई फर्क नहीं पड़ा। और ये 2000 वर्षों तक जारी रहा।’ संघ प्रमुख ने यह भी स्वीकार किया कि समाज में जाति के आधार पर भेदभाव आज भी मौजूद है, ‘आज दिखता नहीं है, लेकिन वो भेदभाव आज भी है। सम्मान की बात है। केवल आर्थिक बराबरी की बात नहीं है, केवल राजनीतिक बराबरी की बात नहीं है।’
नीरजा चौधरी लिखती है कि आरक्षण पर संघ प्रमुख के हालिया बयान में पूर्व पीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह की गूंज सुनाई देती है, जिन्होंने उत्तर में पिछड़ी जातियों के सशक्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की। दक्षिण में पेरियार ने 1926 में ही आत्म सम्मान के लिए ब्राह्मण विरोधी आंदोलन के जरिए इसकी शुरुआत कर दी थी। वीपी सिंह अक्सर कहा करते थे कि पिछड़ों को ‘सहूलियत’ नहीं ‘सत्ता में शिरकत’ चाहिए। सत्ता में भागीदारी चाहिए।
दिलचस्प बात ये है कि 1990 में बीजेपी और आरएसएस ने शुरुआत में आरक्षण का विरोध किया था तो जाति आधारित राजनीति को काउंटर करने के लिए मंदिर प्लान बनाया ताकि हिंदू धार्मिक आधार पर एकजुट हों। अब समय का पहिया एक पूरा चक्कर घूम गया है। कभी कथित सवर्णों की पार्टी कही जाने वाली बीजेपी आज खुद को पिछड़ों और दलितों की सबसे बड़ी हितैषी होने का दावा करती है। आज बीजेपी और आरएसएस मंदिर के साथ-साथ मंडल को भी साधने में कामयाब हैं और केंद्र में हैं एक ओबीसी प्रधानमंत्री।
सनातन धर्म पर स्टालिन के हमले के ठीक बाद भागवत का बयान
दलितों और पिछड़ों को आरक्षण के मामले में भरोसा देने वाले संघ प्रमुख के ये बयान तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन के सनातन पर दिए विवादित बयान के ठीक बाद आए हैं। स्टालिन ने सनातन को जड़ से खत्म करने का आह्वान करते हुए कहा कि इसका वैसा ही उन्मूलन होना चाहिए जैसे ‘मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया और कोरोना’ का होना चाहिए। उनकी पार्टी के ही एक अन्य नेता ए राजा तो सनातन की तुलना ‘कोढ़’ और ‘एचआईवी’ से कर दी। उदयनिधि स्टालिन को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक का समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म असमानता को बढ़ावा देता है। बीजेपी ने सनातन पर इन हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई। कांग्रेस ने इन बयानों से दूरी बना ली। गठबंधन के तमाम समाजवादी दलों ने भी इन बयानों पर नाखुशी का इजहार किया।
स्टालिन ने सियासी नफा-नुकसान को नापतौल कर दिया बयान
नीरजा चौधरी लिखती हैं कि सवाल उठता है कि एम. के. स्टालिन ने अपने बेटे के उस बयान को समर्थन क्यों किया जो I.N.D.I.A. गठबंधन के दलों को असहज कर रहा है? ये बताता है कि उदयनिधि का बयान बहुत सोचसमझकर, नापतौल कर दिया गया है जिसका मकसद दलितों को बीजेपी से दूर करके I.N.D.I.A. खेमे की तरफ लाना है। बयान का मकसद चेन रिएक्शन पैदा करना था। दूसरी तरफ, बीजेपी लगातार ओबीसी और दलितों को लुभाने की कोशिश में लगी है। पीएम मोदी खुद तमिलनाडु को साधने की कोशिश कर रहे हैं। नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान तमिलनाडु के अधीनम संतों ने उन्हें सेंगोल गिफ्ट किया। जी-20 समिट के वेन्यू भारत मंडपम में नटराज की प्रतिमा का भी तमिलनाडु से ही कनेक्शन है। हालांकि, बीजेपी को दक्षिण में कुछ खास सीटें तो मिलने से रहीं। वह उत्तर और पश्चिम में अपनी ताकत को बरकरार रखना चाहती है जहां 2019 में उसका प्रदर्शन चरम पर था। दूसरी तरफ विपक्ष को साउथ और ईस्ट से उम्मीदें हैं।



