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बोइंग का इंटेलसैट 33ई सैटेलाइट टूटकर बना अंतरिक्ष कचरा, 20 टुकड़े फैले.

बोइंग के इंटेलसैट 33ई सैटेलाइट के टूटने से अंतरिक्ष में कचरे के 20 से अधिक टुकड़े बन गए हैं। यह घटना अंतरिक्ष में अचानक हुई, जिससे बोइंग और इंटेलसैट के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

इंटेलसैट 33ई, जो कि यूरोप, अफ्रीका और एशिया में ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध कराता था, भारतीय महासागर के ऊपर भू-स्थिर कक्षा में था। 19 अक्टूबर 2024 को इसका कामकाज बंद हो गया और 21 अक्टूबर 2024 को इसकी पूरी तरह से खराबी की पुष्टि की गई।

इंटेलसैट 33ई का टूटना और मलबा अमेरिकी स्पेस फोर्स ने इस सैटेलाइट के 20 से अधिक टुकड़े होने की पुष्टि की है। हालाँकि, अभी इन टुकड़ों से तत्काल कोई खतरा नहीं है। इंटेलसैट ने बताया कि वे बोइंग और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर इस खराबी के कारणों की जांच कर रहे हैं। इसके लिए फेलियर रिव्यू बोर्ड का गठन किया गया है जो इस मामले की गहन जांच करेगा।

बोइंग के सैटेलाइट प्लेटफ़ॉर्म पर उठे सवाल इंटेलसैट 33ई को 2016 में लॉन्च किया गया था और यह बोइंग के EpicNG प्लेटफॉर्म का हिस्सा था, जिसे आधुनिक और उच्च क्षमता की संचार सेवा के लिए डिज़ाइन किया गया था। परंतु, यह दूसरा मौका है जब इस प्लेटफॉर्म का कोई सैटेलाइट असफल हुआ है। इससे पहले इंटेलसैट 29ई भी खराबी का शिकार हो चुका था। इन असफलताओं के चलते सैटेलाइट की 15 साल की अनुमानित आयु पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे प्लेटफ़ॉर्म की विश्वसनीयता पर चिंता बढ़ गई है।

बढ़ता अंतरिक्ष मलबे का संकट इंटेलसैट 33ई के टूटने से अंतरिक्ष मलबे की समस्या और गंभीर हो गई है। वर्तमान में, स्पेस एजेंसियां 30,000 से अधिक बड़े मलबे के टुकड़ों पर नज़र रख रही हैं। इस कचरे को कम करने के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं, जैसे कि जाल, रोबोट और टेथर का उपयोग, ताकि इस मलबे को साफ किया जा सके।

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