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कोटा में बच्चों के सिर पर नाचता काल! कोचिंग से मौत तक का सफर क्यों तय कर रहे हैं मेडिकल-इंजीनियरिंग के छात्र

कंधे किताबों का बैग और आंखों में भविष्य के सपने लेकर हर साल सैकड़ों छात्र राजस्थान के कोटा पहुंचते हैं। कोटा पिछले एक दो दशक से कोचिंग कैपिटल के नाम से अपनी पहचान बना चुका है। इंजीनियर डॉक्टर बनने के ख्वाबों को ये जगह हकीकत का रूप देने के लिए मशहूर हो चुकी थी, लेकिन यही कोचिंग कैपिटल अब क्राइम कैपिटल बनती जा रही है। जो छीन रही है परिवार वालों से उनके बच्चे। भविष्य तो छोड़िए कोटा में जाकर बच्चों की जिंदगी ही खत्म हो जा रही है। ये हम नहीं कह रहे, ये कह रहे हैं मौत के वो आंकड़े जो चौंकाने वाले हैं। सिर्फ 48 घंटे में 2 बच्चे अपनी जान दे चुके हैं।

कोचिंग कैपिटल से क्राइम कैपिटल क्यों बना कोटा?

48 घंटे में दो बच्चों ने किया सुसाइड

मनजोत सिंह छाबड़ा उत्तर प्रदेश के रामपुर से कोटा आया था ताकि यहां से कोचिंग करने के बाद अपने सपनों को पूरा कर सके, माता पिता का नाम रौशन कर सके, लेकिन 3 अगस्त के दिन मनजोत सिंह की लाश अपने कमरे के पंखे से झूलती मिली। 4 अप्रैल को यहां आया था और ठीक चार महीने बाद उसने मौत को गले लगा लिया। आखिर ऐसा क्या हुआ। मनजोत के कमरे की दीवार में एक सुसाइड नोट चिपका हुआ था जिसमें उसने लिखा था कि वो अपनी मर्जी से सुसाइड कर रहा है। माता-पिता समझ ही नहीं पा रहे कि उन्होंने पढ़ाई के लिए अपने जिगर के टुकड़े को भेजा था या फिर मौत को गले लगाने के लिए। परिवार वालों का आरोप है कि ये हत्या है। हालांकि पुलिस को अब तक ऐसा कोई एंगल नहीं मिला है, लेकिन सवाल तो उठते हैं कि जो बच्चा पढ़ने में इतना अच्छा था, हंसता खेलता, परिवार वालों से अक्सर बात करता, उसने अचानक मौत को क्यों चुन लिया।

पहले मनजोत फिर भार्गव, आगे और कितने!

मनजोत सिंह की गुरुवार को मौत हुई, इसके दो दिन दिन बाद ही फिर कोटा से एक और मौत की खबर आई। इस बार कोटा कोचिंग में मौत को गले लगाने की लिस्ट में नाम था बिहार के भार्गव का। चंपारण का रहने वाला भार्गव इसी साल यहां आया था। उसे आईआईटी जी का एग्जाम पास करना था और उसी की कोचिंग के लिए कोटा आया था। शुक्रवार को जब पूरे दिन परिवार वालों की भार्गव से फोन पर बात नहीं हुई तो उन्हें आशंका ने घेर लिया,मन घबराने लगा। परिवार वालों को दिमाग में बुरे-बुरे ख्याल आने लगे और फिर उन्होंने पीजी के मालिक को फोन किया। जिस बात का डर था वही हुआ जब भार्गव के कमरे का दरवाजा खोला गया सब सन्न रह गए। भार्गव की लाश पड़ी हुई थी। माना जा रहा है कि भार्गव ने भी सुसाइड किया है।

अब तक इस साल 20 बच्चों की हो चुकी है मौत

ये सारे मामले कितने खौफनाक है। माता-पिता अपने बच्चों को पढाई के लिए भेज रहे हैं। लाखों रुपये फीस ली जाती है, लेकिन वहां जाकर एक के बाद एक बच्चों की मौत हो रही है। क्या बच्चों के दिमाग में प्रेशर बनाया जा रहा है एग्जाम को पास करने का? कोटा की इमेज कुछ इस तरह की है कि यहां के इंस्टीट्यूट से ज्यादा से ज्यादा बच्चे निकलते हैं। कहीं इसी होड़ के शिकार बच्चे तो नहीं हो रहे। कोटा हंसते-खेलते बच्चों के लिए काल का काम कर रहा है। भार्गव की मौत के साथ इस साल कोटा में मौत का आंकड़ा बीस हो गया है जो बेहद चिंताजनक है।

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