उन्होंने दावा किया कि देश के "शासकों" में इस मुद्दे पर चर्चा करने और सच्चाई उजागर करने का साहस नहीं है। रेड्डी ने एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में यह बयान दिया। उन्होंने मणिपुर में जारी संघर्ष पर भी चिंता व्यक्त की। मणिपुर की समस्या को वहां की खनिज संपदा से जोड़ा। सवाल उठाया कि केंद्र सरकार और सेना शांति स्थापित क्यों नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने पूछा कि मणिपुर में कौन सी कॉर्पोरेट कंपनियां संघर्ष को बढ़ावा दे रही हैं। रेवंत रेड्डी ने राहुल गांधी की यात्रा के दौरान मणिपुर जाने का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि चीन ने 2,000 वर्ग किमी भारतीय जमीन पर कब्जा किया है। यह मुद्दा संसद में चर्चा के योग्य है, लेकिन इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। मणिपुर में हजारों एके-47 राइफलें इस्तेमाल हो रही हैं। इन मुद्दों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। रेड्डी ने 2020 में चीनी हमले में शहीद हुए कर्नल संतोष बाबू को याद किया। उन्होंने संसद में चीनी घुसपैठ, मणिपुर संघर्ष और अवैध हथियारों पर चर्चा की मांग की। रेड्डी ने कहा कि इन मुद्दों पर चर्चा से ही शांति स्थापित हो सकती है। शांति से देश का विकास संभव है। उन्होंने पूर्व लोकसभा सदस्य रहते हुए रक्षा समिति की बैठकों का उल्लेख किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि वे आधिकारिक चर्चाओं का खुलासा नहीं कर सकते। रेड्डी ने कहा कि जनता अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त है और इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने मणिपुर में संघर्ष को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। चीनी घुसपैठ और मणिपुर संकट को सरकार की प्राथमिकता में लाने की मांग की। उन्होंने इसे देश के विकास और सुरक्षा के लिए अहम बताया।