बिहार में शुरू हुआ ‘क्रेडिट वार’, तेजस्वी यादव पर भारी पड़ रहे नीतीश कुमार!
महागठबंधन सरकार में क्रेडिट वार शुरू हो गया है। आरजेडी हो या जेडीयू, दोनों के बीच उपलब्धियों का श्रेय लेने की होड़ लग गई है। ऐसा नहीं है कि आरजेडी और जेडीयू के बीच पहली बार हो रहा है। ऐसे कई मौके आए, जब कार्यक्रम के दौरान खुले मंच से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजद के मंत्रियों को सलाह दी कि किसी भी कार्य का श्रेय खुद न लें। आप कहें कि हमारी सरकार ने यह किया। परंतु सच्चाई यह भी है कि जब जिसे मौका मिला श्रेय लेने में कोई भी पीछे नहीं रहा। श्रेय लेने की होड़ का नया विवाद इस बार फिर एक पोस्टर बना है। अखबारों में प्रचार के बहाने ही सही शुक्रवार के अखबारों में एक पूरा पेज विज्ञापन से संबंधित है। इस विज्ञापन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शिक्षा सुधार के नायक के रूप में प्रचारित किया गया है।
विज्ञापन के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि शिक्षा के क्षेत्र में बिहार बढ़ रहा है तो इसकी वजह नीतीश कुमार हैं। नीतीश नीत सरकार ने प्राथमिक से लेकर माध्यममिक और उच्च शिक्षा की बेहतरी को लिए काम कर रही है। शिक्षा का बजट लगातार बढ़ रहा है। इस तरह की कई बातें 2005 से 2023 तक क्रम से प्रचारित किया गया है। शिक्षा में सुधार का मतलब नीतीश कुमार हैं। खलने वाली बात यहां यह है कि इस विज्ञापन में सिर्फ नीतीश कुमार ही दिख रहे हैं। इस विज्ञापन में सहयोगी डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव या शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर की तस्वीर को जगह नहीं मिली है।
इसके पहले भी नीतीश ने दिखाई तेजस्वी को आइना
बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से ली गई शिक्षक बहाली भर्ती परीक्षा के बाद रिजल्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद 2 नवंबर 2023 को सीएम नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान में नियुक्ति पत्र सौंपा था। इस परीक्षा में 1,20,336 नए शिक्षक बहाल हुए हैं जिनमें से 25 हजार शिक्षक को गांधी मैदान में और अन्य को उनके जिले में ही नियुक्ति पत्र दिए गए थे। पर गांधी मैदान में जो पोस्टर लगा था उस पोस्टर से तेजस्वी यादव गायब थे। यह दीगर कि डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने क्रेडिट पॉलिटिक्स पर साफ कहा था कि इन सब बातों का कोई मतलब नहीं। महागठबंधन की सरकार ने वादा किया था और नीतीश कुमार के नेतृत्व में हमने उसे पूरा किया है।



