आर्टिकल 370 पर मोदी सरकार के वकील ने ऐसा क्या कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट में ही तमतमा गए कपिल सिब्बल?
हाइलाइट्स
- जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 वापस लाकर उसे राज्य का दर्जा देने की मांग
- सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर गुरुवार को 13वें दिन भी हुई जोरदार बहस
- बहस के दौरान केंद्र सरकार के वकील और कपिल सिब्बल में नोंक-झोंक हो गई
नई दिल्ली :सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने, राज्य का दर्जा बहाल करने और विधानसभा चुनाव कराने की मांगों की याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। सुनवाई के 13वें दिन गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के बीच तीखी बहस हुई। सरकार के लिए पेश हुए मेहता ने अदालत को बताया कि चुनाव किसी भी समय कराये जा सकते हैं और यह फैसला केंद्रीय और राज्य चुनाव आयोग के हाथ में है। हालांकि, राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए समयसीमा के बारे में मेहता ने कहा कि सरकार ‘सटीक समय अवधि नहीं बता सकती है।’
सरकार से सिब्बल के कड़े सवाल
अपने शुरुआती बयान में सॉलिसिटर जनरल ने जम्मू और कश्मीर में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार को उजागर करने के लिए सरकारी आंकड़े भी गिनाए और कहा कि ‘2018 में 52 संगठित बंद हुआ करते थे और अब यह शून्य है।’ इस दलील का वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कड़ा विरोध किया। याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील ने उस टिप्पणी पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष करते हुए कहा, ‘पांच हजार लोग नजरबंद हैं और धारा 144 लागू है, तो धरना कैसे हो सकता है?’ उन्होंने सरकार से ‘लोकतंत्र का मजाक न बनाने’ का आग्रह किया।



