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बैंक में नौकरी करते हैं ये 5 भारतीय क्रिकेटर, कोई अधिकारी तो कोई सरकारी बाबू

भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित कई देशों में क्रिकेटरों को खेल में उनकी उपलब्धियों को पहचानने और पुरस्कृत करने के लिए अक्सर सरकारी नौकरियां दी जाती हैं। इन नौकरियों को आम तौर पर प्रतिष्ठित माना जाता है, जिनमें अच्छा वेतन भी होता है। इसके अतिरिक्त, इन देशों की सरकारें क्रिकेट को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में देखती हैं। सफल क्रिकेटर्स को नौकरी की पेशकश देकर खेल को बढ़ावा देने का तरीका समझा जाता है। ऐसे में चलिए आपको उन पांच खिलाड़ियों के बारे में बताते हैं जो सरकारी बैंक में काम करते हैं।

पहले खराब प्रदर्शन और फिर उसके बाद हुई इंजरी ने केएल राहुल को टीम इंडिया से बाहर कर दिया, फिलहाल तेजी से उबर रहे केएल राहुल भारत सरकार के उपक्रम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में सहायक प्रबंधक भी हैं। उन्होंने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में यह भी कहा था कि उनके माता-पिता उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने से ज्यादा आरबीआई में नौकरी मिलने से खुश थे। आईपीएल में सनरराइजर्स हैदरबाद, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, पंजाब किंग्स जैसी फ्रैंचाइजी का हिस्सा रह चुके राहुल फिलहाल लखनऊ सुपरजायंट्स के कप्तान हैं।

पेशेवर क्रिकेटर होने के साथ-साथ ईशान किशन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी हैं। बिहार के लाल ईशान को आरबीआई पटना में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में नौकरी मिली, 2017 में उन्होंने इस पद पर ज्वाइन किया। विकेटकीपर बल्लेबाज की भूमिका निभाने वाले ईशान किशन के नाम वनडे में दोहरा शतक भी है। फिलहाल वह एशिया कप और वर्ल्ड कप स्क्वॉड में जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

किसी वक्त नंबर चार पोजिशन पर विकल्प के तौर पर देखे जा रहे दीपक हुड्डा 2021 का टी-20 वर्ल्ड कप खेले, लेकिन जल्द ही टीम मैनेजमेंट ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। फरवरी 2023 में आखिरी टी-20 इंटरनेशनल खेलने वाले हुड्डा, घरेलू क्रिकेट का नबड़ा नाम है। आईपीएल में लखनऊ सुपरजायंट्स के अहम सदस्य हैं। अपने साथी क्रिकेटर्स की तरह उन्हें भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी मिली है। हुड्डा प्रतियोगिताओं में आरसीबी की टीम से खेलते भी हैं।

विदर्भ एक्सप्रेस के नाम से मशहूर उमेश यादव भी 2017 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नागपुर ब्रांच में असिस्टेंट मैनेजर बनाए गए। आपको जानकर हैरानी होगी कि उमेश ने पुलिस कॉन्सटेबल की पोस्ट के लिए तैयारी भी की थी, लेकिन बहुत करीबी अंतर से परीक्षा पास करने से चूक गए थे। अब उनके पास कहीं बेहतर सरकारी नौकरी है। जब उमेश को पहली बार 2008 में विदर्भ कैंप में बुलाया गया था, उनके तब के कप्तान प्रीतम गांधी उन्हें सीधा एयर इंडिया ले गए जहां उन्हें उनका पहला कॉन्ट्रेक्ट मिला। हालांकि अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद एयर इंडिया ने उन्हें जॉब नहीं दी।

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