Uncategorized

एक ऐसा अविश्वास प्रस्ताव जिस पर आज तक नहीं होता ‘विश्वास’, संसद का वो किस्सा जिसकी हमेशा होती है चर्चा

मणिपुर के मुद्दे पर संसद के मॉनसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बात बनती नहीं दिख रही है। दोनों अड़े हुए हैं और इस बीच यह भी खबर सामने आ रही है कि केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। सूत्रों के अनुसार विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A की बैठक में इसको लेकर फैसला हुआ है। मणिपुर के मुद्दे पर विपक्ष पीएम मोदी के बयान पर अड़ा है। मॉनसून सत्र के चौथे दिन भी संसद की कार्यवाही बाधित हुई। 25 जुलाई यानी आज इसी मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक हुई और यह जानकारी सामने आ रही कि इस बैठक में शामिल दलों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। हालांकि बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने अपनी राय जाहिर करने के लिए 24 घंटे का वक्त मांगा है। विपक्षी दल इसकी रूपरेखा बनाने में जुट गए हैं। विपक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है तो फिलहाल केंद्र सरकार पर कोई खतरा नहीं है लेकिन 1999 का किस्सा जरूर याद आ जाता है। एक वोट से वाजपेयी की 13 महीने पुरानी सरकार गिर जाती है। इस अविश्वास प्रस्ताव में तत्कालीन कांग्रेस सांसद गिरिधर गमांग के वोट की आज तक चर्चा होती है।

अविश्वास प्रस्ताव पर हमेशा याद रहेगा वो किस्सा
देश में 1998 में हुए आम चुनाव किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। उस वक्त AIDMK के समर्थन से एनडीए ने केंद्र में सरकार बनाई। लेकिन 13 महीने के बाद ही जयललिता ने अपना समर्थन वापस ले लिया जिसके बाद वाजपेयी सरकार अल्पमत में आ गई। राष्ट्रपति ने सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कहा। बसपा सुप्रीमो मायावती ने मतदान में हिस्सा नहीं लेने की बात कही थी लेकिन आखिरी वक्त में मायावती ने सदन में जाकर सरकार के खिलाफ वोट दिया। वोटिंग में सरकार एक वोट से हार गई और सरकार गिर गई। किसी को उम्मीद नहीं थी कि सरकार एक ही वोट से गिर जाएगी और जब ऐसा हुआ तब कांग्रेस सांसद और तत्कालीन ओडिशा के मुख्यमंत्री गिरिधर गमांग अचानक से सुर्खियों में आ गए। सीएम रहते उन्होंने वोट डाला जिसको लेकर काफी विवाद हुआ और बीजेपी ने इसकी काफी आलोचना भी की।सीएम रहते संसद में जाकर दिया सरकार के खिलाफ वोट
गिरिधर गमांग के उस कदम की आज भी चर्चा होती है जब वह सीएम बन जाने के बाद भी वाजपेयी सरकार के खिलाफ वोट दिया था। ओडिशा का मुख्यमंत्री बन जाने के बावजूद 17 अप्रैल 1999 को वाजपेयी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हुए मतविभाजन में उन्होंने हिस्सा लिया। विवाद इसलिए था क्योंकि गमांग दो महीने से ज्यादा समय से ओडिशा के मुख्यमंत्री बन जाने के बावजूद मत विभाजन में हिस्सा लिया था। गमांग ने इतने वक्त बाद भी लोकसभा से इस्तीफा नहीं दिया था और वह कांग्रेस से सांसद थे। इसी का फायदा उठाते हुए 13 महीने पुरानी एनडीए सरकार के खिलाफ उन्होंने वोट डाला। उस दौरान केवल एक वोट से ही वाजपेयी सरकार गिर गई। बीजेपी की ओर से गमांग के वोटिंग में हिस्सा लेने पर विरोध जताया गया। बात यह थी कि जब गमांग सीएम बने तब वह सांसद भी थे। वह विधायक नहीं थे और नियम के मुताबिक 6 महीने के अंदर विधायक बनकर सीएम के रूप में अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाना था। गमांग ने सांसद के पद इस्तीफा नहीं दिया था।

अटल बिहारी वाजपेयी से जब एयरपोर्ट पर हुआ सामना
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री गिरिधर गमांग, उनकी पत्नी और पूर्व सांसद हेमा गमांग और बेटे शिशिर गमांग इसी साल जनवरी के महीने में बीजेपी से भारत राष्ट्र समिति केसीआर की पार्टी बीआरएस में शामिल हो गए। इससे पहले 2015 में गिरिधिर गमांग कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। मजेदार बात यह थी 1999 में जब चुनाव हुए तो एनडीए को बहुमत मिला और अटल बिहारी वाजपेयी अगले 5 साल तक प्रधानमंत्री रहे। अक्टूबर 1999 में तूफान की वजह से कई लोगों की जान चली गई थी और हालात का जायजा लेने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ओडिशा पहुंचे। एयरपोर्ट पर बतौर सीएम गमांग ने अटल जी की स्वागत करने पहुंचे थे। गमांग के मन में कई सवाल थे लेकिन वाजपेयी फ्लाइट से उतरते ही गमांग को देखते मुस्कुराने लगे। इसके बाद दोनों नेताओं की काफी देर तक बात भी हुई।

कैसे लाया जाता है अविश्वास प्रस्ताव और अब तक कितनी बार
केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 50 सांसदों की जरूरत होती है। विपक्षी सदस्यों के पास संख्या पर्याप्त है अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए। अब तक लोकसभा में 27 बार अविश्वास प्रस्ताव आ चुके हैं। पिछली बार जुलाई 2018 में विपक्ष की ओर से मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था और यह गिर गया। अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में 126 वोट जबकि इसके खिलाफ 325 सांसदों ने वोट किया था। अगर मणिपुर मुद्दे को लेकर जारी गतिरोध के बाद सदन में अविश्वास प्रस्ताव आता है, तो इनकी संख्या बढ़कर 28 हो जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button