NDA की बैठक से पहले अमित शाह का बिहार में सीट शेयरिंग फॉर्म्यूला! जानें चिराग, मांझी, सहनी, नागमणि को कितनी सीटें?
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर महागठबंधन और एनडीए की आपसी तनातनी का हश्र क्या होगा यह अभी समय के गर्भ में है। पर जिस तरह से जनता दल यू (JDU) ने अचानक से बिहार की राजनीति में भाजपा को अलग थलग कर दिया था, अब बीजेपी इस संताप से उबर चुकी है। अब गठबंधन के आइडियल स्वरूप प्राप्त कर महागठबंधन को टक्कर देने की स्थिति में आ गई। बिहार की राजनीति में अब भाजपा जातीय समीकरण के आइने में भी खुद को फिट कर ली है। लोकसभा चुनाव में बिहार के महत्व को देख भाजपा महागठबंधन को 30:10 के फॉर्म्यूले से परास्त करने की रणनीति भी बना ली है।
क्या है 30:10 का राजनीतिक समीकरण
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा 30:10 की भागीदारी के साथ चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। इस समीकरण के तहत भाजपा स्वयं 30 लोक सभा सीटों पर चुनाव लड़ने चाह रही है। रही मित्र दलों के बात तो उन्हें 10 सीटों के अंदर उनकी भागीदारी को लॉक करना चाहती है। राज्य में हुए तीन उप चुनावों में दो विधान सभा चुनाव में जीत हासिल करने भाजपा का मनोबल हाई है। हालंकि भाजपा गत लोक सभा चुनाव में 17सीटों पर विजय हासिल की थी।
गठबंधन में लोजपा
इतना तो तय है के बिहार के परिपेक्ष्य में एनडीए में लोजपा दूसरे नंबर की पार्टी रहेगी। गत लोक सभा में लोजपा को छह लोक सभा सीटों पर जीत मिली थी। लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी अमित शाह से छह लोक सभा और एक राज्य सभा की डिमांड की है। भाजपा के सूत्रों के अनुसार लोजपा को चार या अधिकतम पांच सीटें मिलने जा रही है। समस्तीपुर और नवादा भाजपा खुद लड़ने जा रही है। हाजीपुर लोकसभा को लेकर जिद अभी कायम है। भाजपा के रणनीतिकार कोई हल निकलेंगे।
रालोजद की हिस्सेदारी
आज की बैठक में शामिल होने के निमंत्रण मिलने के बाद यह कहा जा रहा कि सीट को लेकर राष्ट्रीय लोक जनता दल के बीच सीटों का एडजस्टमेंट का मामला सुलझा लिया गया है। अनुमान है कि रालोजद को दो या तीन सीटें मिलेंगी। जब रालोजद भाजपा के साथ लोकसभा चुनाव लड़ी थी तब तीन लोकसभा सीट मिली थी और तीनों पर जीत मिली थी। मिली जानकारी के मुताबिक दो से तीन सीट भाजपा उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को दे सकती है।




