रांची : चतरा जिले से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी अनिश्चय गंझू की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला मगध और आम्रपाली कोयला परियोजना से जुड़ा हुआ है। अनिश्चय गंझू चतरा के लावालौंग थाना क्षेत्र का निवासी है। वह पिछले कई वर्षों से इस मामले में न्यायिक हिरासत में है। अदालत में उसकी ओर से जमानत की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया। फैसले के बाद मामले ने एक बार फिर चर्चा का विषय बना लिया है। जांच एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से देख रही हैं। एनआईए लंबे समय से इस प्रकरण की जांच कर रही है। अदालत का यह आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किया गया है।
जानकारी के अनुसार अनिश्चय गंझू पर प्रतिबंधित संगठन टीपीसी के लिए धन जुटाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कोयला खनन क्षेत्र से जबरन वसूली की जाती थी। आरोप है कि अवैध तरीके से धन एकत्र कर संगठन को आर्थिक सहायता पहुंचाई जाती थी। अनिश्चय गंझू पर लेवी वसूली में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि वह अन्य लोगों के साथ मिलकर कारोबारियों में भय का माहौल बनाता था। स्थानीय व्यापारियों से कथित रूप से वसूली की जाती थी। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए थे। एनआईए ने मामले में विस्तृत अनुसंधान किया है। जांच एजेंसी ने अदालत में विभिन्न दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए थे। मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। इसी आधार पर अदालत में सुनवाई आगे बढ़ी थी।
यह मामला मूल रूप से टंडवा थाना में दर्ज किया गया था। टंडवा थाना कांड संख्या 2/16 के तहत इसकी शुरुआत हुई थी। बाद में एनआईए ने मामले को अपने हाथ में लिया। इसके बाद स्वतंत्र रूप से केस दर्ज कर जांच शुरू की गई। मामले में कई अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए थे। इनमें कुछ आरोपियों को उच्च अदालतों से जमानत मिल चुकी है। सुदेश केडिया, संजय जैन और महेश अग्रवाल सहित कई लोगों को पहले राहत मिल चुकी है। अजय कुमार, अजीत कुमार ठाकुर और सुभान मियां का नाम भी मामले में शामिल रहा है। इसके बावजूद अनिश्चय गंझू की जमानत याचिका स्वीकार नहीं की गई। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय सुनाया। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में ही रहेगा।



