जामताड़ा सदर अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। घटना के विरोध और सुरक्षा की मांग को लेकर डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। अस्पताल के मुख्य द्वार पर कर्मचारी धरना देकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा का माहौल सुनिश्चित किए बिना कार्य करना संभव नहीं है। कर्मचारियों ने घटना में शामिल आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग भी उठाई है। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि हालिया घटनाक्रम से उनमें भय का माहौल बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से ठोस सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है। आंदोलनरत कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। इस घटनाक्रम के बाद अस्पताल प्रशासन और जिला प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पूरे मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है।
हड़ताल का असर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अधिकांश चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित हो गई हैं। ओपीडी सेवाएं बंद रहने से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूर-दराज के क्षेत्रों से इलाज के लिए पहुंचे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। कई मरीजों ने बताया कि लंबी दूरी तय कर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन उपचार नहीं मिल सका। परिजनों ने भी स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने पर चिंता जताई है। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले लोगों की संख्या प्रभावित हुई है। जिला प्रशासन स्वास्थ्यकर्मियों और अधिकारियों के साथ लगातार संवाद कर रहा है। गतिरोध समाप्त करने के लिए प्रयास जारी हैं। हालांकि अभी तक कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आ सका है।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर जामताड़ा थाना में मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में कई नामजद लोगों के साथ अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। अस्पताल प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि हंगामे के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। साथ ही ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के कार्य में बाधा उत्पन्न की गई। दूसरी ओर परिजनों का आरोप है कि गर्भवती महिला को समय पर उचित इलाज नहीं मिला। उनका कहना है कि गंभीर स्थिति होने पर महिला को रेफर किया गया और रास्ते में उसकी मौत हो गई। इसी घटना के बाद अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़ हुई थी। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। फिलहाल पूरे मामले को लेकर जिले में चर्चा का माहौल बना हुआ है।



