JharkhandStates

मॉल्ट स्पिरिट परमिट को लेकर शराब उद्योग में विवाद.

उत्पाद विभाग के फैसले पर निर्माताओं ने सवाल उठाए.

जानकारी के अनुसार मॉल्ट स्पिरिट का उपयोग सामान्यतः भारत निर्मित विदेशी शराब यानी आईएमएफएल के निर्माण में किया जाता है। इसके बावजूद कुछ देशी शराब निर्माण कंपनियों को भी मॉल्ट स्पिरिट का परमिट जारी किए जाने की चर्चा है। इस फैसले के बाद शराब उद्योग से जुड़े कई उत्पादकों ने आपत्ति जताई है। उद्योग जगत में इस विषय को लेकर असंतोष का माहौल बताया जा रहा है। उत्पादकों का कहना है कि विभिन्न प्रकार की शराब के निर्माण के लिए अलग-अलग मानक और प्रक्रियाएं निर्धारित हैं। ऐसे में परमिट जारी करने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता आवश्यक है। मामले ने विभागीय निर्णयों पर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल यह मुद्दा शराब उद्योग में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार राज्य में 25 डिग्री देशी शराब के निर्माण के लिए मुख्य रूप से एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल यानी ईएनए का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा स्वाद और रंग के लिए कैरेमल तथा अन्य फ्लेवर का इस्तेमाल किया जाता है। दूसरी ओर भारत निर्मित विदेशी शराब के उत्पादन में मॉल्ट स्पिरिट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उत्पाद विभाग द्वारा विदेशी शराब निर्माताओं को मॉल्ट स्पिरिट खरीदने और उपयोग करने के लिए विशेष परमिट जारी किया जाता है। इसी आधार पर कंपनियां आवश्यक कच्चा माल प्राप्त करती हैं। देशी शराब निर्माण इकाइयों को सामान्य रूप से ईएनए उपयोग के लिए अनुमति दी जाती है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि दोनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग उत्पादन मानक निर्धारित हैं। ऐसे में परमिट वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। इस मुद्दे को लेकर विभिन्न कंपनियों के बीच भी चर्चा जारी है। कई उत्पादक इस मामले में विभाग से स्पष्टीकरण की अपेक्षा कर रहे हैं।

शराब उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि परमिट व्यवस्था में किसी भी बदलाव का सीधा प्रभाव उत्पादन प्रक्रिया पर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। उत्पादकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि देशी शराब निर्माण इकाइयों को मॉल्ट स्पिरिट परमिट किन परिस्थितियों में जारी किया गया। दूसरी ओर विभाग की ओर से अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। उद्योग से जुड़े पक्ष इस विषय पर स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और चर्चा हो सकती है। राज्य में शराब उत्पादन और वितरण व्यवस्था को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभिन्न कंपनियां अपने स्तर पर स्थिति का आकलन कर रही हैं। फिलहाल विवाद और असंतोष की स्थिति बनी हुई है। संबंधित पक्षों की नजर अब विभाग के अगले कदम पर टिकी है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button