मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में हुई। इस फैसले के बाद कानूनी और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मामला पहले से ही काफी चर्चित रहा है। विकास तिवारी का नाम कई आपराधिक मामलों से जुड़ता रहा है। अदालत के फैसले के बाद विभिन्न पक्षों की निगाहें आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं। जमानत मिलने के बाद मामले को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पुलिस और अभियोजन पक्ष भी मामले की आगे की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। यह मामला कोयलांचल क्षेत्र के चर्चित घटनाक्रमों में शामिल रहा है। अदालत का आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किया गया है।
यह मामला चैनपुर थाना क्षेत्र में हुए आपराधिक वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ा हुआ है। इस घटना में भरत पांडेय और दीपक साव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं अंशु सिंह और बब्लू सिंह गंभीर रूप से घायल हुए थे। घायलों का संबंध पांडेय गिरोह से बताया जाता है। घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने मामले की जांच के बाद कई लोगों को आरोपी बनाया था। हत्याकांड को लेकर लंबे समय तक जांच और कानूनी कार्रवाई चलती रही। कोयलांचल क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई को इस घटना की मुख्य वजह माना गया था। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई थी। मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्य जांच एजेंसियों के सामने आए थे। अदालत में इसी मामले को लेकर सुनवाई जारी थी।
भरत पांडेय के पिता प्रदीप पांडेय ने छह जनवरी 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में विकास तिवारी समेत 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने मामले में विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की थी। जानकारी के अनुसार विकास तिवारी के खिलाफ लगभग 25 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। इनमें कई चर्चित मामले भी शामिल बताए जाते हैं। सुशील श्रीवास्तव हत्याकांड सहित 17 मामलों में वह बरी हो चुका है। कुछ मामलों में उसे पहले से जमानत मिली हुई है। हाईकोर्ट द्वारा जमानत मिलने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। कानूनी विशेषज्ञ भी फैसले के विभिन्न पहलुओं पर नजर रखे हुए हैं। संबंधित पक्षों की ओर से आगे की कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद विकास तिवारी को जमानत का लाभ मिल गया है।



