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चंदा मामा हम आ रहे हैं… आगे बढ़ो ISRO, पूरा भारत साथ है

हार हो जाती है जब मान लिया जाता है
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
…और भारत ने आज ठान लिया है। 4 साल पहले की वो धड़कनें बढ़ाने वाली रात, मायूसी लेकर आई अगली सुबह, इसरो के तत्कालीन चेयरमैन की आंखों में आंसू, पीएम नरेंद्र मोदी का द्रवित होना फिर साइंटिस्टों में जोश भरना… आज वो सब याद आ रहा है। चांद पर उतरने से महज 2 किमी दूर था अपना यान और विक्रम खामोश हो गया। वो खामोशी इतने महीनों तक सालती रही है। आखिर भारत हार मानने वाला कहां था। 6 सितंबर 2019 की तारीख भला कौन सा भारतीय भूल सकता है। एक बार फिर 140 करोड़ भारतीयों के हौसलों से खड़ा हुआ भारत का बाहुबली रॉकेट चंद्रयान-3 को लेकर उड़ने जा रहा है। दोपहर 2.35 बजे अपनी पीठ पर चंद्रयान-3 को लेकर जैसे ही बाहुबली सफर पर निकलेगा, भारत में तालियों का शोर गूंजेगा। जी हां, आज का दिन भारत के लिए नई उम्मीदें लेकर आया है। ISRO में शायद साइंटिस्टों को रातभर नींद भी न आई हो। इन दिनों हर भारतीय का दिल भी इसरो के लिए धड़क रहा है। सोशल मीडिया पर #Chandrayaan3 ट्रेंड कर रहा है। फ्रांस से पीएम मोदी का शुभकामना संदेश भी आ गया है। उन्होंने लिखा है कि चंद्रयान-3 देश की उम्मीदें और सपने लेकर जाएगा।एक पुराना वीडियो भी वायरल है जिसमें के. सिवन की आवाज सुनाई देती है। वह चंद्रयान-2 से संपर्क टूटने की सूचना देते सुने जाते हैं। कई एक्सपर्ट उन्हें संभालते हैं। अगले सीन में प्रधानमंत्री मोदी सिवन से हाथ मिलाते हैं। शाबाशी की दो थपकी पीठ पर देते हैं और गले लगा लेते हैं।जिसने भी उस दिन वो नजारा देखा होगा, आंखों में आंसू आ गए होंगे। उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया था, उसने निराश हो चुके देश में फिर से ऊर्जा का संचार किया।

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