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बाढ़ में डूबा हिमाचल का पंचवक्त्र मंदिर, दृश्य देख लोग हो रहे हैरान, ऐसी है यहां की मान्यताएं

हिमाचल प्रदेश में तीन दिन से जारी मूसलाधार बारिश की वजह से चारों तरफ तबाही और जल प्रलय जैसा मंजर दिख रहा है। लेकिन चारों तरफ मचे हाहाकार और बाढ़ के बीच मंडी जिला का ऐतिहासिक पंचवक्त्र मंदिर, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और गहन आध्यात्मिकता के प्रमाण के रूप में खड़ा है। भगवान शिव को समर्पित पंचवक्त्र मंदिर का यह मंदिर त्रिलोकीनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो भी भक्त यहां शिव का ध्यान करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं पंचवक्त्र मंदिर की मान्यताएं और इतिहास…

300 साल पुराना है मंदिर

मंडी को छोटी काशी भी कहा जाता है क्योंकि जिस तरह काशी गंगा नदी के तट पर स्थित है, उसी तरह मंडी ब्यास नदी के तट पर स्थित है। मंडी के प्रमुख स्थानों में से एक है पंचवक्त्र मंदिर। यह मंदिर सुकोती और ब्यास नदी के संगम पर स्थित है। बताया जाता है कि यह मंदिर 300 साल पुराना है और इसे तत्कालीन राजा सिद्ध सेन (1684-1727) ने बनवाया था। विशाल मंच पर खड़ा यह मंदिर बाढ़ के बीच भी बहुत अच्छी तरह से सुसज्जित है।

मंदिर को चारों ओर से बाढ़ ने घेरा

हिमाचल में आई बाढ़ से सारा आधुनिक निर्माण धराशाई हो गया है लेकिन मंदिर पूरी तरह टिका हुआ है। यह मंदिर हर मॉनसून सीजन में जलमग्न हो जाता है लेकिन मंदिर पूरी तरह नहीं डूबता। बताया जा रहा है कि 100 साल बाद बाढ़ ने मंदिर के बगल स्थिति विक्टोरिया ब्रिज को अपनी चपेट में ले लिया है। बाढ़ के पानी ने मंदिर को चारों ओर से घेर लिया है लेकिन बाढ़ का मंदिर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

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