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हाथ नहीं, गरीबी बेशुमार तो कैसे पूरा हो सेना में जाने का सपना? मासूम की मदद को आगे आए CM एकनाथ शिंदे

घर में गरीबी, जन्म से ही दोनों हाथों से विकलांग और आठ साल की छोटी सी उम्र में मां का साया छूट जाना। इसके बावजूद इस विपरीत हालात में सीखने की मजबूत इच्छाशक्ति रखने वाले गणेश माली अपनी विकलांगता को मात देकर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गणेश माली की मदद के लिए आगे आए हैं। गणेश के दोनों हाथ नहीं हैं और उनका सपना सेना में शामिल होने का है। मुख्यमंत्री ने गणेश के सपने को पूरा करने का बीड़ा उठाया है। गणेश की आर्थिक स्‍थित‍ि देखकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें तुरंत पहले चरण में 5 लाख की मदद की। इसी तरह सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी गणेश को 5 लाख की मदद की है। इसके साथ ही गणेश माली को आर्टिफिशियल हाथ भी लगाए जाएंगे।

​दूसरी क्‍लास में पढ़ते हैं गणेश माली​

गणेश माली महाराष्ट्र में नंदुरबार जिले के शहादा तालुका के असलोद गांव के रहने वाले हैं। उनके प‍िता का नाम अनिल माली है। आठ साल के गणेश माली दूसरी कक्षा में पढ़ते हैं लेकिन किस्मत को इस प्यारे चेहरे का साथ नहीं मिला। आठ साल के गणेश का जन्म दोनों हाथों के बिना हुआ था। भले ही उनके हाथ नहीं थे, फिर भी उन्होंने केवल आठ साल की उम्र में अपनी विकलांगता पर काबू पा लिया और शिक्षा के प्रति उनका समर्पण आश्चर्यजनक है।

​पढ़ाई में आड़े आ रही थी गरीबी

बुद्धि और जिद के मालिक गणेश माली की पढ़ाई में गरीबी आड़े आ रही थी। छोटी सी उम्र में अपनी मां का प्‍यार खो चुके गणेश मदद का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गणेश को उनकी बेहतर पढ़ाई के लिए पांच लाख का चेक सौंपा। अब गणेश अपने भविष्य में दूसरों के लिए एक प्रेरणादायक बनेगा।

​मुख्‍यमंत्री ने मदद को बढ़ाए हाथ

मुंबई में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गणेश को उनकी बेहतर पढ़ाई के लिए पांच लाख का चेक सौंपा है। आठ साल के गणेश ने अपनी विकलांगता पर काबू पा लिया है और जीवन के लिए संघर्ष जारी रखा है। सीएम ट्रीटमेंट रूम में मंगशे चिवटे ने भी गणश के इलाज के लिए सभी तरह के टेस्‍ट क‍िए। हालांकि, गणेश के हाथ का कोई इलाज नहीं हो पाएगा। ऐसे में उनको आर्टिफिशियल हाथ लगाए जाएंगे।

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