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बिहार में 2000 के नोट पर मचा सियासी बवाल, नीतीश की पार्टी ने बीजेपी से पूछे 4 बड़े सवाल

क्या भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से 2000 के नोट को बंद किए जाने का फैसला जनता पर दूसरा नोटबंदी थोपने जैसा है? क्या 2016 के नोट बंदी की तरह इस बार भी आम जनता को लाइन में खड़े होकर नोट बदलना पड़ेगा? क्या नोट बदलवाने के लिए 30 सितंबर तक का दिया गया वक्त कम है? क्या इससे देश की गरीब जनता पर असर पड़ेगा? ये कुछ ऐसे सवाल है जो 2000 के नोट बंद किए जाने के फैसले के बाद बीजेपी विरोधी तमाम राजनीतिक दलों की ओर से उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा आम लोगों की ओर से भी कुछ सवाल पूछे जा रहे हैं।

जेडीयू ने बताया दूसरा नोटबंदी

नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड की ओर से 2000 के नोट को बंद किए जाने के फैसले का विरोध किया गया है। जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक झा और मनजीत ने पार्टी लाइन से अवगत कराते हुए कहा कि केंद्र सरकार की ओर से अचानक ₹2000 के नोट के इस्तेमाल पर रोक लगाने के फैसला दूसरा नोटबंदी है। जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि 2016 में हुई नोटबंदी के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि इससे काले धन का पता लगाने में मदद मिलेगी। नोटबंदी से आतंकवाद खत्म हो जाएगा साथ ही देश से नक्सलवाद भी खत्म हो जाएगा।

जेडीयू ने मांगा जवाब

2000 के नोट बंद किए जाने के बाद जनता दल यूनाइटेड ने केंद्र की बीजेपी सरकार से पूछा है कि 2016 की नोटबंदी से कितना काला धन का पता लगाया जा सका? नोटबंदी के चलते देश से कितना आतंकवाद और नक्सलवाद खत्म हो सका? जेडीयू ने केंद्र की बीजेपी सरकार से इस मामले में कई सवाल पूछे हैं।

1. 2016 की नोटबंदी से केंद्र की बीजेपी सरकार ने कितना काला धन का पता लगाया और अगर पता चला तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?

2. पहली नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने दावा किया था कि इससे देश में आतंकवाद की समस्या खत्म हो जाएगी। केंद्र सरकार बताए कि पहली नोटबंदी के बाद देश से कितना आतंकवाद खत्म हुआ?

3. 2016 की नोटबंदी के दौरान केंद्र सरकार का दावा था कि इससे देश में नक्सलवाद पर गहरी चोट की जा सकेगी। जेडीयू केंद्र सरकार से ये सवाल पूछती है कि पहली नोटबंदी से देश से क्या नक्सलवाद खत्म हो गया?

4. 2016 की नोटबंदी के दौरान आम आदमी बुरी तरह परेशान हुआ था। बैंकों की लाइन में लगने वाले कई लोगों की जान भी गई थी। अब केंद्र सरकार ने एक बार फिर से 2000 के नोट के चलन को बंद कर दिया है। ऐसे में क्या इस बार भी लोगों को बैंकों की लाईनों में खड़ा रहना पड़ेगा?

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