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 ‘सम्मान पाने की जंग’, जादू-टोने पर अमानवीय बर्ताव की शिकार महिलाओं का दर्द रूह कंपा देगा

गुमलाः झारखंड में अंधविश्वास के कारण महिलाओं के साथ क्रूरता की खबरें अक्सर सामने आती हैं। गुमला जिले की 40 वर्षीय भिखनी के पड़ोसी ने कथिरत तौर पर सपने में उसे ‘जादू-टोना’ करते देखा था। इसके बाद भिखनी को निर्वस्त्र करके बालों से पकड़ कर घुमाया गया। उसे प्रताड़ित किया गया और ऐसे ऐसे अत्याचार किए गए जो सोच से भी परे हैं। घटना को दो वर्ष बीत चुके हैं लेकिन आज भी भिखनी सदमे में है। उसे रातों में नींद नहीं आती और इस बात का डर सताता है कि आरोपी जब जेल से छूटेगा तो क्या होगा?

महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा करने और भय निकालने की कोशिश

राज्य सरकार के कार्यक्रम ‘गरिमा’ के तहत दीदियों से काउंसलिंग करा रही भिखनी कहती है-‘वह मुझे मार डालेगा…छोड़ेगा नहीं’। राज्य सरकार के इस कार्यक्रम का लक्ष्य ऐसे अमानवीय बर्ताव की शिकार हुई महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा करना और उनके मन से भय निकालना है।

सामाजिक बहिष्कार और तिरस्कार की यातना

रामपुर गांव की 45 वर्षीय रेबेका टिर्की भी इन्हीं अनुभवों से गुजर चुकी हैं। रेबेका बताती हैं कि उनके पड़ोसी की बच्ची बीमार पड़ गई थी और इससे बाद उसे डायन करार दे दिया गया । यहीं से शुरू हुई थी उसके सामाजिक बहिष्कार और तिरस्कार की यातना। शांति खल्खो की भी कहानी कमोबेश ऐसी ही है और वह कहती है कि जब भी उसे याद आता है कि कैसे उसे घर से बाहर घसीट कर लाया गया था और जिंदा जलाने की तैयारी कर ली गई थी, वह सिहर उठती है।

476 अमानवीय बर्ताव के मामले सामने आए

एक अधिकारी के अनुसार गुमला में जादू-टोने करने का आरोप लगा कर महिलाओं के साथ अमानवीय बर्ताव करने के मामले की संख्या 476 है। इस संबंध में पूछे जाने पर उपायुक्त सुशांत गौरव कहते हैं कि इस सामाजिक बुराई के खिलाफ अभियान चला कर लोगों के बर्ताव में बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई ऐसा मामला सामने आता है तो आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाती है। उपायुक्त ने कहा कि इस प्रकार के मामले नहीं हो,यह जागरुकता फैलाने के लिए ‘गरिमा’ कार्यक्रम के तहत अभियान चलाए जाते हैं और नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जाते हैं।

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