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Diwali 2022: दीपावली में अपनी माटी से जुड़ें, खूबसूरत घरोंदे से घर की सजावट में लगायें चार चांद

दीपावली को देखते हुए जमशेदपुर के कई जगहों पर मिट्टी से बने उत्पाद की दुकाने सजायी गयी है. इन दुकानों में खूबसूरत घरोंदे, दीपक व लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं लोगों को आकर्षित कर रही है. इस दीपावली गंगा की मिट्टी से बने घरोंदे से अपनी खुशियों में चार चांद लगा सकते है.

Diwali 2022: हम कितने भी आधुनिक हो जायें, लेकिन आज भी त्योहारों में देसी सामग्रियों के इस्तेमाल को प्राथमिकता देते है. इस दीपावली हम मिट्टी के दीये से घर रोशन करने के साथ ही गंगा की मिट्टी से बने घरोंदे से अपनी खुशियों में चार चांद लगा सकते है. कुम्हारों व मूर्तिकारों ने तकनीक के सहारे मिट्टी को नये कलेवर में इस बार बाजार में उतारा है. दीपावली को देखते हुए साकची, बिष्टुपुर, गोलमुरी, बारीडीह, सिदगोड़ा, स्टेशन रोड, जुगसलाई आदि जगहों पर मिट्टी से बने उत्पाद की दुकाने सजायी गयी है. इन दुकानों में खूबसूरत घरोंदे, दीपक व लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं लोगों को आकर्षित कर रही है.

कलाकारों की कारीगरी व मिट्टी की खूबसूरती लोगों को इन्हें खरीदने को विवश कर रही है. इसकी खरीदारी हमें करनी भी चाहिए, क्योंकि इससे न केवल हमारी माटी से जुड़े होने की भावनाएं बलवती होगी, बल्कि इसके पीछे कई सपने बुने गये है. वैसे भी हजारे त्योहार व विभिन्न परंपराओं में मिट्टी का विशेष महत्व है. दीपावली समेत कई त्योहार हमारी परंपराओं और मान्यताओं की वजह से मिट्टी के बाजार, कुम्हार व कलाकारों का अस्तित्व बरकरार है.

नकारात्मकता दूर करते हैं मिट्टी के घरौंदे

दीपावली में मिट्टी का घरौंदा बनाना शुभ माना जाता है. पंडित एके मिश्रा बताते हैं कि पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद कार्तिक माह की अमावस्या को अयोध्या लौटे. उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने अपने घरों में घी के दीपक जलाये और उनका स्वागत किया. अयोध्यावासियों का मानना था कि भगवान श्रीराम के आगमन से ही उनकी अयोध्यानगरी फिर से बसी है. उसी समय से घरौंदा बनाकर उसे सजाने का प्रचलन शुरू हुआ. उन्होंने बताया कि मिट्टी का घरौंदा बनाकर पूजा करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है. मान्यता है कि घरौंदा बनाने वाली लड़कियां जब दाम्पत्य जीवन में प्रवेश करेंगी, तो उनका संसार भी सुख-समृद्धि से भरा रहेगा.

कुम्हारों ने बनाये मिट्टी के घरौंदे

दीपावली को देखते हुए कुम्हारों ने मिट्टी के दीये के साथ ही घरौंदा भी बनाया है. बाराद्वारी निवासी कमला देवी और उनके पति दिलीप कुमार ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष भी मिट्टी के घरौंदे बनाये हैं. इन घरौंदों की कीमत 350-800 रुपये तक सिर्फ घरौंदा ही नहीं इस साल है. घरौंदे की कीमत पलोर व डिजाइन के अनुसार अलग-अलग है. कुम्हारिन कौशल्या देवी ने बताया कि उन्होंने इस बार सिर्फ डिजाइनर घरौंदे ही बनाये हैं. जिसकी कीमत 400-750 रुपये तक है.

थर्माकोल का घरौंदा

अगर आप हल्का और डिजाइनर घरौंदा चाहते हैं, तो थर्माकोल का घरौंदा ले सकते हैं. इसमें कई तरह के डिजाइन उपलब्ध हैं. कुटिया से लेकर बंगला, चार तल्ला का घरौंदा, मंदिर आदि डिजाइन में मिल जायेंगे. कुटिया व एक तल्ले वाले घरौंदे की कीमत 150 रुपये है. बाकी 200 से लेकर 600 रुपये तक में मिल रहे हैं.

मिट्टी की झालर दीये से सजायें घर

आप मिट्टी से बनी तरह-तरह के चीजों से आप अपने घर की सजावट कर सकते हैं. आकाश दीप की तरह ही घर के अंदर और बाहर रोशनी के लिए आपको मिट्टी की झालर मिल जायेगी. यह कलरफुल भी है. इसमें मिट्टी का दीया जला कर घर की किसी भी जगह पर सुसज्जित कर सकते हैं. इसके अलावा तुलसी मंच पर तुलसी दीया जलायें. इसे तुलसी मंच की तरह ही लुक दिया गया है.

कृष्णनगर से मंगवाये गये हैं गंगा की मिट्टी के घरौंदे

पहले लोग अपने घरों में मिट्टी का घरौंदा बनाते थे. अब फ्लैट कल्चर, मिट्टी की कमी के कारण लोग रेडिमेड घरौंदा खरीद करलाते हैं. इस साल कुम्हारों ने कृष्णनगर पश्चिम बंगाल से गंगा की मिट्टी का घरौंदा मंगवाया है. अलग-अलग तरह की डिजाइन के साथ-साथ घरौंदे में दीया और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा स्थापित है. गंगा की मिट्टी से बने होने के कारण फिनिशिंग बहुत बढ़िया है.

from prabhat khabar

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