रांची में हाईकोर्ट ने पीआईएल मामलों को लेकर सख्ती दिखाई है। अदालत ने कहा कि गलत जानकारी देना गंभीर अपराध है। कई लोग निजी हित के लिए याचिकाएं दायर कर रहे हैं। इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अदालत ने इसे दुरुपयोग माना है। हाल में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक उदाहरण पेश किया। वहां एक वकील को जुर्माना लगाया गया। उसने शपथ पत्र में गलत तथ्य दिए थे। अपने खिलाफ केस भी छिपाया था। अदालत ने इसे गंभीर मामला बताया।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़ी टिप्पणी की। कहा गया कि ऐसे मामलों को रोका जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने सड़क अतिक्रमण का मुद्दा उठाया था। लेकिन उसकी नीयत पर सवाल उठे। शुगर मिल ने भी अपनी बात रखी। उसने निजी रंजिश का आरोप लगाया। अदालत ने सभी पक्षों को सुना। अंत में याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाया गया। इससे स्पष्ट संदेश गया। न्यायालय ने पारदर्शिता पर जोर दिया।
झारखंड हाईकोर्ट में भी इसी तरह का मामला सामने आया। नेतरहाट विद्यालय से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने हस्तक्षेप के प्रयासों को गलत माना। एक अधिकारी का आवेदन खारिज किया गया। उस पर भी जुर्माना लगाया गया। राशि को सामाजिक संस्था को देने का निर्देश दिया गया। अदालत ने कहा कि प्रक्रिया का सम्मान जरूरी है। गलत जानकारी देने वालों पर कार्रवाई होगी। इससे न्याय व्यवस्था मजबूत होगी। लोगों को सही जानकारी देने की सीख मिली।



