झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य ऊर्जा निगम से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बर्खास्त जूनियर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के परिवार को राहत प्रदान की। कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई को प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण बताया। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने फैसला सुनाया। पहले दिए गए एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा गया। अदालत ने ऊर्जा निगम की अपील खारिज कर दी।
मामले के अनुसार स्वर्गीय मनोज प्रसाद झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड में जूनियर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2013 में बिजली चोरी के मामले में उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बाद में उन पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया। सतर्कता ब्यूरो की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ। छापेमारी के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। जमानत मिलने के बावजूद विभागीय कार्रवाई जारी रही।
23 अगस्त 2017 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। अपील लंबित रहने के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। कोर्ट ने कहा कि जांच में गवाहों की गवाही दर्ज नहीं की गई। कर्मचारी को जिरह का अवसर भी नहीं दिया गया। जांच रिपोर्ट केवल दस्तावेजों पर आधारित थी। अदालत ने इसे कानूनन गलत माना। ऊर्जा निगम को चार सप्ताह में सभी लाभ पत्नी किरण सिंह को देने का आदेश दिया गया।



