सुग्रीम पूरन को वर्ष 2025 में दोषी ठहराया गया था। सरायकेला के सक्षम न्यायालय ने सजा सुनाते हुए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अभियुक्त ने इस सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट में अपील विचाराधीन रहने के दौरान अभियुक्त की ओर से अंतरिम आवेदन दाखिल किया गया। इस आवेदन में जमानत की मांग की गई थी। अदालत ने आवेदन पर सुनवाई की।
न्यायमूर्ति रंगोन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने जमानत मंजूर कर ली। इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। अब अंतिम निर्णय शीर्ष अदालत के हाथ में है।



