विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ एक स्कूल ने अयप्पा दीक्षा लेने के बाद पारंपरिक पोशाक और माला पहनकर आए एक छात्र को कथित तौर पर स्कूल में प्रवेश देने से मना कर दिया। स्कूल प्रशासन ने छात्र को वापस घर जाने और सामान्य यूनिफॉर्म में आने को कहा। इस घटना के बाद, स्थानीय धार्मिक और सामाजिक समूहों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिससे प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने स्कूल प्रशासन को नोटिस जारी कर दिया है। DEO ने स्कूल से पूछा है कि धार्मिक दीक्षा के दौरान छात्र को उसकी पारंपरिक वेशभूषा में क्यों रोका गया, जबकि यह एक अस्थायी धार्मिक पालन का हिस्सा है। अयप्पा दीक्षा के तहत, भक्त एक निश्चित अवधि के लिए व्रत रखते हैं और काले या नीले रंग के कपड़े तथा माला पहनते हैं। यह दीक्षा हिंदू धर्म में गहरी आस्था का प्रतीक मानी जाती है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि स्कूल को छात्रों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और धार्मिक पालन के आधार पर उन्हें शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। यह घटना शैक्षिक संस्थानों और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। DEO ने स्कूल से जल्द से जल्द जवाब माँगा है और चेतावनी दी है कि यदि स्कूल का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं रहा, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम धार्मिक आस्था के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की दिशा में उठाया गया है।



