एनआईए ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) या ULFA (I) के प्रमुख परेश बरुआ सहित दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। यह कार्रवाई असम में शांति और सुरक्षा बनाए रखने तथा उग्रवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के भारत सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
आरोप पत्र में परेश बरुआ, अभिजीत गोगोई और जहनु बरुआ को नामजद किया गया है। इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एनआईए ने एक विस्तृत जांच के बाद यह आरोप पत्र तैयार किया है, जिसमें आरोपियों की भूमिका, साजिश के पहलुओं और उनके द्वारा अंजाम दी गई आपराधिक गतिविधियों को उजागर किया गया है। एजेंसी ने इस मामले में पुख्ता सबूत जुटाने का दावा किया है।
यह मामला असम में सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है, क्योंकि यूएलएफए (आई) जैसे उग्रवादी संगठन क्षेत्र में अशांति फैलाने और विकास को बाधित करने के लिए ऐसी साजिशों को अंजाम देते रहे हैं। एनआईए का यह कदम ऐसे संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उनकी आपराधिक गतिविधियों को रोकने के उसके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह आरोप पत्र अब अदालती कार्यवाही का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे इस जघन्य साजिश में शामिल सभी दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके।


