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PM Modi के पास विपक्षी एकता की काट क्या, ममता बनर्जी के फॉर्मूले पर बन गई बात तो फंस जाएगा 2024 का चुनाव?

बिहार के लिए जून का महीना गर्मी की दोहरी मार का गवाह बनेगा। एक तो मौसम का मिजाज गर्मी की दृष्टि से तल्ख होगा तो दूसरा सियासी सरगर्मी भी बढ़ी रहेगी। बिहार के सत्ताधारी दल विपक्षी एकता में मशगूल रहेंगे तो उसके तुरंत बाद पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) उनके इरादों पर पानी फेरने पहुंचेंगे। उनके पिटारे में बिहार के लोगों को आकर्षित करने के लिए क्या-क्या घोषणाएं और वादे होंगे, यह अभी तक किसी को नहीं मालूम। हां, इतना तय है कि विपक्ष के मंसूबे पर पानी फेरने की पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) कोशिश जरूर करेंगे। वहीं विपक्ष अगर ममता बनर्जी के फॉर्मूले को मान लेता है तो लोकसभा चुनाव के वक्त बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

विपक्षी एकता के लिए 12 को नेताओं का जुटान

बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की सलाह पर विपक्षी एकता मिशन में जुटे बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने 12 जून को विपक्षी नेताओं की पटना में बैठक बुलाई है। बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी जैसे कांग्रेस के शीर्ष स्तर के नेता तो आएंगे ही, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल के भी पहुंचने की स्वीकृति मिल चुकी है। ममता बनर्जी तो 11 जून को ही पटना पहुंच जाएंगी। बकौल नीतीश कुमार, दो दर्जन विपक्षी पार्टियों के नेता देश भर से बैठक में आएंगे। असम से लेकर कश्मीर तक के नेताओं के बैठक में भाग लेने की संभावना है। बैठक की तैयारियों में महागठबंधन के नेता जुटे हुए हैं।

विपक्षी दलों की बैठक में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला

माना जा रहा है कि चूंकि विपक्षी दलों की यह पहली बैठक है, इसलिए कोई खास नतीजा तो नहीं निकलेगा। लेकिन अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर खाका तैयार किया जा सकता है। विपक्षी एकता के लिए सबसे पहला काम था विपक्षी नेताओं को एक मंच पर लाना, जो नीतीश कुमार ने कर लिया है। अब सीटों के बंटवारे के तरीके पर चर्चा होनी है। पीएम फेस घोषित हो या बिना फेस के ही विपक्षी मोर्चा चुनाव में उतरे, इस पर भी फैसला होना है। ममता बनर्जी का एक सुझाव पहले आया था कि जिन राज्यों में जो दल मजबूत स्थिति में है, उसके ही नेतृत्व में वहां सीटों के बंटवारे पर काम होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण भी दिया था कि बंगाल में टीएमसी की सरकार है तो दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। बिहार में महागठबंधन की सरकार में आरजेडी-जेडीयू मजबूत हैं तो कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। यानी अपने चार राज्यों में सीटों के बंटवारे का काम कांग्रेस करे। इस पर कांग्रेस तैयार होती या नहीं, यह देखना दिलचचस्प होगा।

अध्यादेश पर ‘आप’ और कांग्रेस में दिखी अनबन

इधर विपक्षी एकता के प्रयास में दिल्ली सरकार के लिए केंद्र का सेवा अध्यादेश सबसे बड़ी अड़चन बन सकता है। दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल विपक्ष के हर नेता से मिल कर अध्यादेश के विरोध में साथ मांग रहे हैं। वे अब तक बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक का दौरा कर चुके हैं। जिन विपक्षी दलों के नेताओं से उन्होंने अब तक मुलाकात की है, उन सबने ‘आप’ का साथ देने का वादा भी किया है। इधर कांग्रेस ने अपने पंजाब और दिल्ली के नेताओं के दबाव में अध्यादेश पर साथ न देने का फैसला किया है। केजरीवाल की योजना थी कि अध्यादेश पर तमाम विपक्षी दल एकजुट हो जाएं तो राज्यसभा में संख्या बल कम होने से सरकार की हार हो सकती है। इससे विपक्षी एकता की परख भी हो जाएगी और बीजेपी के खिलाफ खड़े होने के लिए विपक्ष को इससे नैतिक बल भी मिलेगा। ऐसे में देखना है कि केजरीवाल पहले की तरह बैठक से दूर रहते हैं या साथ आते हैं।

PM नरेंद्र मोदी भी जून में ही आने वाले हैं बिहार

जून में बीजेपी भी बिहार में चार बड़ी रैलियों के आयोजन की तैयारी में है। एक में तो पीएम नरेंद्र मोदी के भी भाग लेने की संभावना है। बाकी रैलियों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की बात बीजेपी के सूत्र बता रहे हैं। बीजेपी के अन्य बड़े नेता भी रैलियों में शिरकत करेंगे। रैलियों के जरिये बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि पीएम मोदी के शासन के 9 साल में देश में क्या-क्या उल्लेखनीय काम हुए हैं। खासकर बिहार के लिए मोदी सरकार ने क्या किया है। इसके साथ ही पीएम मोदी बिहार के लिए कुछ घोषणाएं भी कर सकते हैं। उनके पिटारे में क्या-क्या गिफ्ट होंगे, इस पर अभी कोई कुछ नहीं बता रहा, लेकिन इतना तय है कि बिहार में किला फतह करने के लिए वे कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं। 

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