हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कंपनी से कितने कर्मचारियों की छंटनी की गई है और उन्हें किस आधार पर निकाला गया है।
पेटीएम ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कई स्टार्टअप कंपनियां हाल ही में आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं और लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी का सहारा ले रही हैं। पेटीएम को भी इसी परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा होगा, यही वजह है कि कंपनी ने कथित तौर पर कर्मचारियों की छंटनी की है।
श्रम आयुक्त द्वारा पेटीएम प्रबंधन को समन किया जाना इस बात का संकेत है कि सरकारी एजेंसियां हाल ही में हुईं स्टार्टअप कंपनियों में छंटनी पर ध्यान दे रही हैं। यह देखना बाकी है कि श्रम विभाग पेटीएम मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या कंपनी को छंटनी प्रक्रिया के दौरान किसी भी श्रम कानून का उल्लंघन पाया जाता है।
कुल मिलाकर, पेटीएम में हुई कथित छंटनी की खबर डिजिटल पेमेंट्स सेक्टर के लिए चिंता का विषय है। यह घटना स्टार्टअप कंपनियों के सामने आने वाली आर्थिक चुनौतियों और श्रम कानूनों के अनुपालन की अहमियत को भी उजागर करती है।

