सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाया है। नवंबर 2024 में, कोर्ट ने एक याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति केवल आरक्षण का लाभ लेने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन करता है, तो यह संविधान और न्यायपालिका के साथ धोखाधड़ी माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमित रूप से किसी अन्य धर्म की परंपराओं का पालन करने वाला व्यक्ति खुद को हिंदू बताकर अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ नहीं उठा सकता।
स्थानीय संगठनों की प्रतिक्रिया
केंद्रीय युवा सरना विकास समिति जैसे स्थानीय संगठन भी इस मुद्दे पर सक्रिय हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों का अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगाई जाए और धर्मांतरण निषेध बिल को सख्ती से लागू किया जाए।
सरकार से अपेक्षाएं
विधायक और स्थानीय संगठनों की मांग है कि सरकार इस विषय पर ठोस कदम उठाए। उन्होंने सुझाव दिया कि धर्म परिवर्तन करने वालों को आरक्षण के लाभ से वंचित रखा जाए, ताकि वास्तविक हकदारों को उनका अधिकार मिल सके।
निष्कर्ष
धर्म परिवर्तन कर आरक्षण का लाभ उठाने का मुद्दा झारखंड में गंभीर बहस का विषय बन गया है। विधायक, न्यायपालिका और स्थानीय संगठनों की संयुक्त आवाज़ इस ओर इशारा करती है कि सरकार को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि सामाजिक न्याय की मूल भावना बनी रहे और वास्तविक लाभार्थियों को उनका हक मिल सके।


