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भारत-ईयू व्यापार समझौते पर 10वें दौर की बातचीत 10 मार्च से.

नई दिल्ली: भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर 10वें दौर की बातचीत 10 मार्च से ब्रुसेल्स में शुरू होगी।

इस बातचीत का उद्देश्य शेष मुद्दों को हल करना है ताकि इस साल के अंत तक समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके।

मुख्य बातें:

  1. भारत और ईयू के बीच यह वार्ता पिछले साल से तेज़ हो गई है।
  2. दोनों पक्ष इस समझौते को संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभदायक बनाना चाहते हैं।
  3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईयू आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इस साल के अंत तक समझौते को पूरा करने पर सहमति जताई थी।
  4. इससे पहले जून 2022 में दोनों पक्षों ने आठ साल के लंबे अंतराल के बाद वार्ता को फिर से शुरू किया था।
  5. वार्ता 2013 में रुक गई थी, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच बाजार खोलने के स्तर पर मतभेद थे।
  6. बातचीत में निवेश सुरक्षा समझौता और भौगोलिक संकेत (GI) पर भी चर्चा होगी।
  7. प्रमुख अड़चनों में डेयरी उत्पादों, वाइन, ऑटोमोबाइल आयात शुल्क और श्रम-प्रधान उत्पादों के लिए नियामक बाधाएं शामिल हैं।
  8. भारत ऑटोमोबाइल आयात शुल्क कम करने को लेकर सतर्क है और स्थिरता एवं श्रम मानकों पर ईयू की मांगों पर सावधानीपूर्वक विचार कर रहा है।
  9. सेवा व्यापार पर भी दोनों पक्षों के बीच विवाद है, जहां भारत प्रोफेशनल्स की आवाजाही और डेटा सुरक्षा को लेकर छूट चाहता है।
  10. भारत ने पिछले वर्ष ईयू को 76 अरब डॉलर के सामान और 30 अरब डॉलर की सेवाएं निर्यात की थीं।

कृषि क्षेत्र में प्रमुख विवाद:

  1. ईयू भारत से चीज़ और स्किम्ड मिल्क पाउडर पर शुल्क में कटौती की मांग कर रहा है।
  2. भारत अपने घरेलू डेयरी उद्योग की रक्षा के लिए इन उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाए रखता है।
  3. ईयू के जटिल गैर-शुल्क आधारित प्रणाली (NAV) के कारण कृषि वार्ता विशेष रूप से कठिन हो गई है।

व्यापारिक महत्व:

  1. यदि समझौता सफल होता है तो भारत और ईयू के बीच व्यापारिक संबंधों में बड़ा इजाफा हो सकता है।
  2. वित्तीय वर्ष 2024 में भारत-ईयू द्विपक्षीय व्यापार 190 अरब डॉलर को पार कर गया था।

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