दिवाली खुशियों नहीं शोक का दिन है भाई! यूपी के मिर्जापुर में लोगों के इस अजीब दावे की बड़ी वजह पता है?
देशभर में दिवाली का पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। प्रभु श्रीराम के अयोध्या वापस लौटने पर देशभर में लोग घरों में पूजा अर्चना करते है। दिवाली और आतिशबाजी करके पर्व को धूमधाम के साथ मनाते है। मगर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में दिवाली पर्व के दिन एक ऐसा गांव है, जहां पर लोग शोक मनाते है। गांव के लोग वर्षों से इस परंपरा का बखूबी पालन करते आ रहे है। दिवाली के दिन सारे लोग इकट्ठा होकर शोक मानते है।
मिर्जापुर जिले के मड़िहान तहसील के अटारी गांव में दिवाली के दिन शोक मनाया जाता है। चौहान बाहुल्य अटारी गांव में दिवाली का पर्व नहीं मनाया जाता है। आस-पास के लगभग आधा दर्जन गांव में दिवाली का पर्व चौहान लोग नहीं मनाते है। ग्रामीणों का कहना है कि हम लोग हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के हम वंशज है। दिवाली के दिन ही उनकी हत्या हुई थी। इसी दिन मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान की हत्या की थी। इसलिए उस दिन हम अपने घर में दीपक नही जलाते है। दिवाली के दिन सारे लोग इक्कट्ठा होकर पृथ्वी राज चौहान को याद करते है।
एकादशी के दिन मानते है दिवाली पर्व
अटारी गांव के रहने वाले रामधनी सिंह चौहान ने बताया कि दिवाली के दिन पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु हुई थी। इसलिए हम लोग इस दिन शोक दिवस के रूप में मनाते है। हमारे पूर्वज दिवाली का पर्व नहीं मनाते थे। हम भी इस परंपरा का निर्वहन कर रहे है। हमारी पीढ़ी भी आने वाले वक्त में दिवाली का पर्व नहीं मनाएगी। एकादशी के दिन हम लोग दीपावली का पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाते है। मुन्नी देवी ने बताया कि बचपन से ही हम लोगों के घरों पर दिवाली नहीं मनाई जाती है। हम भी इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए आ रहे है। हमारी आने वाली पीढ़ी भी इस परंपरा का निर्वहन करेगी।



