उन्होंने कहा कि सरकार को एफसीआरए (विदेशी योगदान नियमन अधिनियम) को “हथियार” बनाकर उपयोग करने और मणिपुर के लोगों को नजरअंदाज करने जैसे सवालों का जवाब देना चाहिए।
क्रिसमस पर सवाल
डेरेक ओ’ब्रायन ने पूछा कि मोदी सरकार ने क्रिसमस को ‘सुशासन दिवस’ में बदलने की कोशिश क्यों की।
एफसीआरए का दुरुपयोग
उन्होंने आरोप लगाया कि ईसाई समुदाय द्वारा चलाए जाने वाले संस्थानों को निशाना बनाने के लिए एफसीआरए का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मणिपुर की अनदेखी
टीएमसी नेता ने मणिपुर के मुद्दों पर चुप्पी साधने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की।
धर्मांतरण कानून पर सवाल
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 25 का उल्लंघन करते हुए, सरकार राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून क्यों लागू कर रही है।
अल्पसंख्यकों के बीच विभाजन
उन्होंने कहा कि सरकार वक्फ बिल और अन्य मुद्दों के जरिए अल्पसंख्यकों को बांटने की कोशिश कर रही है।
ईसाई समुदाय पर बढ़ते हमले
ओ’ब्रायन ने कहा कि ईसाई समुदाय पर हमले और उनके संस्थानों को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
फादर स्टेन स्वामी का मामला
उन्होंने 2021 में हिरासत में फादर स्टेन स्वामी की मौत का जिक्र करते हुए सरकार की आलोचना की।
मानवाधिकार आयोग पर सवाल
उन्होंने पूछा कि 2014 के बाद से भारत के मानवाधिकार आयोग की संयुक्त राष्ट्र की मान्यता दो बार क्यों छीन ली गई।
ईसाई नेतृत्व की भूमिका
ओ’ब्रायन ने कहा कि ईसाई नेतृत्व को सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संविधान की रक्षा के लिए स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
क्रिसमस समारोह में पीएम की भागीदारी
उन्होंने पीएम मोदी के क्रिसमस समारोह में शामिल होने पर भी सवाल उठाए और इसे राजनीतिक बताया।
चर्च के नेतृत्व से अपील
टीएमसी नेता ने कहा कि चर्च को संविधान की रक्षा के लिए मजबूत कदम उठाने चाहिए।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता
उन्होंने केंद्र से अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और नफरत भरे भाषणों पर कार्रवाई करने की मांग की।


