मृत कारोबारी मनोज परमार द्वारा छोड़े गए कथित सुसाइड नोट ने विवाद खड़ा कर दिया है।
घटना का विवरण
मनोज परमार और उनकी पत्नी ने अपने घर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
सुसाइड नोट में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य नेताओं से उनके बच्चों का ख्याल रखने की अपील की।
परमार ने बीजेपी नेताओं और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर उन्हें परेशान करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जितू पटवारी ने इसे “राज्य प्रायोजित हत्या” करार दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया कि परमार को बीजेपी सरकार और ED ने परेशान किया।
बीजेपी का बचाव
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को “गिद्ध राजनीति” बताया।
बीजेपी के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस बिना तथ्यों के आरोप लगा रही है।
ED की कार्रवाई
ED ने 5 दिसंबर को परमार और अन्य पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत छापेमारी की थी।
छापेमारी में 3.5 लाख रुपये की बैंक राशि फ्रीज की गई और चार संपत्तियों का पता चला।
ED के अनुसार, परमार ने 6 करोड़ रुपये के फर्जी लोन लेकर संपत्तियों में निवेश किया।
राजनीतिक जुड़ाव का मुद्दा
कांग्रेस का दावा है कि इसी कारण उन्हें निशाना बनाया गया।
जांच की मांग
कमलनाथ ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से निष्पक्ष जांच की मांग की।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और परमार के परिजनों के बयान जल्द दर्ज किए जाएंगे।
अधिकारियों का बयान
पुलिस ने कहा कि सुसाइड नोट की सत्यता की जांच की जा रही है।
ED ने कहा कि छापेमारी और पूछताछ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा थी।
प्रभावित परिवार का हाल
परमार के परिवार ने अब तक कोई बयान नहीं दिया है क्योंकि वे शोक में हैं।



